04 फ़रवरी, 2012

इस अचूक मंत्र के द्वारा शत्रु भी बन जायेगा मित्र

यह सत्य है कि मन्त्रों में शक्ति होती है। परन्तु मन्त्रों की क्रमबद्धता, शुद्ध उच्चारण और प्रयोग का ज्ञान भी परम आवश्यक है। जिस प्रकार कई सुप्त व्यक्तियों में से जिस व्यक्ति के नाम का उच्चारण होता है, उसकी निद्रा भंग हो जाती है, अन्य सोते रहते हैं उसी प्रकार शुद्ध उच्चारण से ही मन्त्र प्रभावशाली होते हैं और देवों को जाग्रत करते हैं।

अगर आपका कोई शत्रु है और आप उससे परेशान है तो यह जान लें कि शत्रुओं के मन से शत्रु भाव मिटाना बड़ा ही कठिन है, लेकिन आज आपको एक ऐसा आसान उपाय बताने जा रहे हैं जिसके द्वारा शत्रु भी आपका मित्र बन जाएगा और भूलकर भी सपने में वह आपका अहित नहीं सोचेगा।

आज आपको एक आसान मंत्र बताने जा रहे हैं जिसके द्वारा आप किसी को भी अपना मित्र बना सकते हैं तो आइये जाने क्या है या आसान मंत्र-

गरल सुधा रिपु करहिं मिताई, गोपद सिंधु अनल सितलाई

आपको बता दें कि कोई मंत्र नहीं बल्कि यह तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस की एक चौपाई है|

विधि-

प्रत्येक सुबह स्नानादि करके भगवान राम की पूजा करें| हमेशा ध्यान रहे कि आप जब भी पूजा कर रहे हो तो आप का मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए| इसके बाद कुश के आसन पर बैठें और तुलसी की माला से इस मंत्र का जप करें। कम से कम 5 माला का जप अवश्य करें। कुछ ही दिनों में आपके शत्रु, मित्र बन जाएंगे।

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