25 जून, 2013

देसी 'आम' हुए 'खास'

छत्तीसगढ़ में मौसम ने देसी आम को खास बना दिया है। फसल कमजोर पड़ने से अचारी आम भी आम लोगों के पहुंच से दूर हो गए हैं। शुरुआती दौर में बौर देखकर प्रदेश के ज्यादातर जिलों में रिकार्ड उत्पादन की संभावना जताई जा रही थी, पर बार-बार बदलते मौसम ने आम की फसल को पूरी तरह से खराब कर डाला है। इस कारण इस वर्ष भी लोगों को आम का स्वाद लेना महंगा पड़ रहा है। प्रदेश के ज्यादातर इलाकों में वसंत के आगमन के साथ ही उन्नत नस्ल के आम के पेड़ों पर लगे बौर से किसानों के चेहरे पर रौनक आ गई थी। वहीं देसी प्रजाति के आम के पेड़ों में भी बौर आने शुरू हो गए थे। उम्मीद की जाने लगी थी कि इस साल आम की फसल काफी अच्छी होगी, मगर मौसम ने पानी फेर दिया।

गौरतलब है कि पिछले चार साल से खराब मौसम के कारण छत्तीसगढ़ में आम की फसल कम हुई है। हवा-पानी के कारण भी समय-समय पर बौर झड़ गए, जिससे आम के रसीले खट्ठे-मीठे स्वाद से ज्यादातर लोग वंचित रह गए थे। इस वर्ष पेड़ों में बौर लगने के बाद बारिश नहीं होने के कारण बौर भी खराब हो गए थे। प्रदेश के जशपुर जिले में बड़ी संख्या में किसान आम की खेती करते हैं। देसी के साथ-साथ उन्नत प्रजाति के आम के बागान भी यहां बड़ी संख्या में लगाए गए हैं, जिसे इस वर्ष मौसम ने खराब कर दिया। इससे किसानों को लाखों रुपये का नुकसान होगा।

जिले में 4020 हेक्टेयर में आम के पौधे लगे हुए हैं, जिनसे 15678 किसान फसल लेते हैं। इस वर्ष आखरी समय में मौसम की बेरुखी से आम का फसल खराब हो गया है, जिससे 50 से 60 प्रतिशत उत्पादन में गिरावट आ गई। इसी तरह की स्थिति कुछ और जिलों में भी देखने को मिली हैं। महासमुंद, धमतरी, दुर्ग, बेमेतरा और कवर्धा में भी आम का उत्पादन लेनेवाले किसान हताश और निराश हैं।

प्रदेश के आम विक्रेताओं का कहना है कि पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष फसल अच्छी होने की संभावना थी और प्रदेश में खासकर जशपुर जिले के आम उत्पादक आम के पेड़ पर पर्याप्त बौर होने से संतुष्ट नजर आ रहे थे। फल झड़ जाने जाने के कारण आम के उत्पादक निराश नजर आ रहे हैं। 

कृषक सुनील पाटले ने बताया कि हाईब्रिड पेड़ के बौर पहले ही झड़ गए थे। यहां देसी के अलावा चौसा, लंगड़ा, दशहरी, फजलीह, बाम्बेग्रीन जैसी उन्नत प्रजातियों के आम का भी अच्छा उत्पादन होता है। देसी आम स्थानीय बाजार में खप जाते हैं। वहीं उन्नत प्रजाति के आम को रायपुर, बिलासपुर, झारसुगुड़ा, खरसिया सहित जगह अन्य जगहों में निर्यात किया जाता है। 

कृषकों के बागानों के साथ-साथ उद्यानिकी विभाग के बागानों में आम की फसल चौपट होने से जिले सहित अन्य राज्यों के लोगों को रसीले आमों का स्वाद नहीं मिल पाएगा। इस संबंध में उद्यान अधीक्षक सियाराम सिंह यादव कहते हैं कि इस वर्ष बेहतर मौसम के बाद भी आम की फसल 50 प्रतिशत कम हुई है। यही वजह है कि लोकल आम भी ज्यादा कीमतों पर बिक रहे हैं।

छत्तीसगढ़ में, खासकर जशपुर क्षेत्र में जून-जुलाई में आम के फल की तोड़ाई होती है, जिससे यहां के किसानों को अच्छा भाव मिल जाता था। हाईब्रीड आम जहां चांपा, बिलासपुर, रायपुर, झारखंड ओडिशा के क्षेत्रों में जाते थे, वहीं आचार के लिए देसी आम की भी खूब मांग रहती है। इस समय जिस अनुपात में फल निकल रहा है वह पर्याप्त नहीं है। जिसके कारण दाम बढ़ गए हैं। जहां हाईब्रीड आम 40 से 80 रुपये किलो बिक रहे हैं, वहीं देसी आम 20 से 25 रुपये किलो बिक रहे हैं जो अन्य वर्षो की तुलना में काफी अधिक हैं।

pardaphash se saabhar

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