यहाँ बिना दूल्हे के होती है शादियाँ

अभी तक आपने बहुत शादी देखी और सुनी होगी जिसमें एक दूल्हा घोड़ी पर चढ़कर आता है और अपनी राजकुमारी को ले जाता है| क्या कभी आपने कोई ऐसी बारात देखी है जिसमें दूल्हा न हो? शायद नहीं! पर हिमाचल प्रदेश के दुर्गम कबायली जिला लाहुल स्पीती में शादी की रस्म ही अलग है| यहाँ कई गाँवों में बारात में दूल्हा नहीं बल्कि उसकी बहन कुछ निशानी लेकर जाती है और दूल्हन को अपने घर विदा कराकर लाती है| 

शीत नारुस्थल के नाम से जाने जाने वाली इस घाटी के जिला मुख्यालय केलोंग सहित गाहर घाटी के बिलिंग, युरिनाथ, रौरिक, छिक्का, जिस्पा अदि कई ऐसे गांव हैं जहां बैंड बाजा बारात तो होती है पर दूल्हा नहीं होता है यहाँ दूल्हे के स्थान पर बहन जाती है|

घाटी की मियाद, तिणन, गाहर अदि घाटियों की शादी की रस्में मेल भी खाती हैं। इस घाटी में विवाह की सबसे पुराणी रसम गंधार्भ विवाह है। यहाँ अपनी पसंदीदा लड़की उठा कर ले जाने की परंपरा आज भी प्रचलित है| वर द्वारा कन्या को उठा ले जाने के बाद वर पक्ष के लोग कन्या पक्ष के घर मक्खन लगी शराब लेकर जाते हैं यदि कन्या पक्ष के लोग उस शराब की बोतल का ढक्कन खोल देते हैं तो समझो रिश्ता पक्का यदि नहीं तो रिश्ता नामंजूर माना जाता है| घाटी में इस रिश्ते की मंजूरी को कई साल भी लग जाते हैं और ऐसी शादियों के निर्वहन में बच्चों ही नहीं बल्कि पोतो के शरीक होने के भी कई प्रमाण मिलते हैं।

www.pardaphash.com

ليست هناك تعليقات: