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इच्छाधारी नाग बना बाबा, भक्तों को बांट रहा संजीवनी बूटी!

आगरा: भारतीय जनमानस में इच्छाधारी नाग अथवा नागिन की अनगिनत कथाएं मौजूद हैं। किवदंतियों के अनुसार ये इच्छाधारी नाग अथवा नागिन कोई भी रूप धर सकते हैं। कहीं भी जा सकते हैं। हिन्दी फिल्मकारों ने समाज में व्याप्त सर्प सम्बंधी अंधविश्वास की धारणाओं का जमकर दोहन किया है। उन्होंने न सिर्फ इस विषय फिल्में बनाकर मोटा मुनाफा कमाया है, वरन समाज में अंधविश्वास की धारणा को और ज्यादा गहरा करने का काम भी किया है। जानकारों की माने तो ये सारी बातें कोरी बकवास हैं। इनका सत्य से कोई लेना-देना नहीं है| फिलहाल इच्छाधारी नाग नागिन का एक मामला ताज नगरी आगरा में देखने को मिला है| यहां एक बाबा इच्छाधारी नाग होने का दावा कर लोगों का इलाज कर रहा है। लोगों का मानना है कि उनके हाथ से दवा पीने पर 21 दिन में ही बीमारी खत्म हो जाती है। 

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिव शक्ति बाबा भुड़कनाथ (29) का असली नाम मनोज सिंह यादव है। वह गाजीपुर का रहने वाला है। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई के बाद आईटीआई की और फिर बाबा बन गए। करीब एक हफ्ते पहले बाबा ने ककरैठा में अपना डेरा जमा लिया। इसके बाद उनके शिष्यों ने गांव-गांव में पर्चे बांटना शुरू कर दिया। इन पर्चों में बाबा के इच्‍छाधारी नाग होने का जिक्र है। इसमें लिखा है कि बाबा इच्‍छाधारी नाग हैं। उनकी गाय में दैवीय शक्ति है। बाबा के हाथ से दवा पीने पर कोई भी बीमारी 21 दिन में खत्म हो जाती है। साथ ही इस पर्चे को छपवाकर बांटने वाले को भी फायदा होगा। 

फिर क्या था लोग बाबा के नाम के पर्चे छपवाकर बांटे लगे| बाबा का कहना है कि उनके पास कुछ दवाएं है, जिससे मरीज पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। यह 21 दिनों की दवा है। इसमें लौकी का जूस, जामुन और कई जड़ी-बूटियां शामिल हैं। इसे यहां आने वाले मरीजों को खीर में मिलाकर दिया जाता है। बाबा की दवा लेने के लिए लोगों को घंटों अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। इसकी जानकारी होने पर स्वास्थ्य विभाग की एक टीम वहां पहुंची| हालांकि बाबा के भक्तों ने दवा की जांच नहीं करने दी। 

आपको बता दें कि यह इच्छाधारी नाग का यह पहला मामला नहीं है इससे पहले भी कई मामले देखे गए| अभी हाल ही में एक ऐसा मामला औरंगाबाद में देखने को मिला था| बिहार के औरंगाबाद में देखने को मिला है| यहां एक किशोरी की शादी इच्छाधारी नाग से होने की अफवाह फैली। अफवाह पर ही यह शादी देखने के लिए 50 हजार से अधिक लोगों की भीड़ जुट गई। हद तो यह हो गई कि किशोरी को सजाकर खड़ा कर दिया गया, लेकिन नाग को न आना था, ना आया। 

यहां यह अफवाह फैलाई गई थी कि गांव के अखिलेश भुइयां की बेटी रेणु कुमारी की शादी इच्छाधारी नाग से होगी। वर नाग रूप में आएगा और इंसान से शादी करेगा। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। चर्चा ये उड़ाई गई कि गांव की एक किशोरी जब एक दिन अपने घर आ रही थी तो उसे एक नाग ने रोक लिया। बाद में आदमी का रूप धर कर उसने लड़की से शादी करने का प्रस्ताव रखा और शादी के लिए दिन तय किया। फिर क्या था यह अनोखी शादी देखने के लिए हर तरफ से लोगों का रेला आना शुरू हो गया| सुबह आठ बजे तक सारा इलाका लोगों से पट गया। सभी सड़कें जाम हो गईं। खेतों से लेकर सड़कों तक, पेड़ों से लेकर मकानों तक लोग भरे पड़े थे। कुछ महिलाएं तो बाकायदा शादी के गीत गाते हुए टोलियों में पहुंचीं। लेकिन जब कोई इच्छाधारी नाग लड़की को ब्याहने नहीं पहुंचा तो हर कोई किशोरी के मां-बाप को कोसता हुआ अपने घर चला गया| 

एक ऐसा ही मामला वाराणसी जिले में भी देखने को मिला था| वाराणसी के पिंडरा विकास खंड के राजपुर ग्रामसभा के राजस्व गांव बड़वापुर के रहने वाले संदीप नाम के व्यक्ति ने इच्छाधारी नागिन से शादी करने का दवा किया था| अपने आप को पूर्वजन्म में नाग और इस जन्म में नागिन से शादी का दावा करने वाले संदीप ने बताया कि गांव के ही शिव मंदिर के बगल में इच्छाधारी नागिन से उसकी मुलाकात हुई थी। नागिन ने उसे बताया था कि 20 साल पूरा होने पर वह उससे शादी करने के लिए आएगी। बड़वापुर के रहने वाले दयाशंकर वर्मा के दो लड़कों में छोटा लड़का संदीप कुमार दावा कर रहा था कि उसके ऊपर नाग देवता की सवारी है। उसकी शादी इच्छाधारी नागिन से चार अप्रैल को शिव मंदिर में होगी। हालाँकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ| 

इससे पहले इच्छाधारी नाग' की शादी का मामला उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में अगस्त 2014 को देखने को मिला था| बांदा जिले के बबेरू थाने के पवैया गांव निवासी दलित युवक अरुण कुमार ने भी दावा किया था कि वह इच्छाधारी नाग है, नाग पंचमी को नागिन से शादी करेगा| अरुण ने ग्रामीणों को बताया था कि एक इच्छाधारी नागिन सपने में उसे बताती है कि वह उसका पूर्व पति है और उसके चाचा ने उसकी हत्या कर दी थी, अब वह हत्यारे के घर में जन्म लिया है| बकौल अरुण, 'मैं इच्छाधारी नाग हूं और नाग पंचमी को नागिन से शादी करूंगा' उसके इस ऐलान से आस-पास के गांवों के हजारों लोगों का हुजूम इकट्ठा हो गया| इसी दौरान बबेरू पुलिस को सूचना मिली और वह मौके पर पहुंच कर कथित इच्छाधारी नाग को हिरासत में ले लॉकअप में बंद कर दिया| उधर, गांव में मौजूद प्रत्यक्षदर्शी सहदेव रैदास ने बताया कि पुलिस जैसे ही अरुण को हिरासत में लेकर चली गई तो एक नागिन 'बांबी' से निकलकर आई और गुस्से में उसने कई लोगों को खदेड़ा| उसका कहना था कि नागिन के इस तरह खदेड़ने से साबित होता है कि इन दोनों में जरूर कोई पुराना रिश्ता है|

नफरत की आग में सुलगा शमशाबाद

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के शमसाबाद में गुरुवार को सांप्रदायिक संघर्ष के बाद शुक्रवार को आग गांवों तक फैल गई। उपद्रवी सुबह से ही सड़कों पर आ गए| समुदाय विशेष के धार्मिक स्थल में तोड़फोड़ कर दी। घटना से तनाव बढ़ा और पुलिस ने बाजार बंद करा अघोषित कर्फ्यू लगा दिया। परंतु इस बीच गांव-गांव बवाल होने लगा। शाम तक तीन मजारें तोड़ दीं। शाम को कस्बे में खोखा फूंक दिया। बवाल बढ़ता देख रैपिड रेस्पांस फोर्स (आरआरएफ) और पीएसी को मोर्चे पर तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने गुरुवार की घटना में 500 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया है, जिनमें से 15 गिरफ्तार कर लिए हैं।

मामला आगरा शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर शमशाबाद इलाके का है। पैगंबर के बारे में आकाश गुप्‍ता नाम के शख्स ने गुरुवार को सोशल नेटवर्किंग साइट फेसबुक पर टिप्पणी कर दी थी। यह सूचना पूरे शमशाबाद में फैल गई। इसके बाद खास समुदाय के लोग इकट्ठा हो गए और आकाश को पकड़ लिया। दर्जनों लोग युवक को पकड़कर पीट रहे थे और लोग हंगामा करके फांसी लगाने की मांग कर रहे थे। तभी कुछ लोगों ने आकाश के गले में फंदा डाल दिया। लोग उसे पेड़ से लटकाने जा रहे थे, तभी आकाश के पक्ष के लोगों की भीड़ आ गई। दोनों समुदायों के लोगों के बीच मारपीट हुई और आकाश को छुड़ा लिया गया। इसके बाद हालात बेकाबू होने लगे। आसपास से लोग ट्रैक्‍टर, ट्रॉली, जीप व अन्‍य वाहनों में भरकर लोग शमशाबाद पहुंचने लगे। दोनों समुदायों के बीच जमकर मारपीट होने लगी| थाने पर हंगामा किया। बाद में मोहल्ला टोला में दोनों पक्षों में पथराव व फायरिंग होने लगी। पेट्रोल बम फेंके गए। 

वहीँ, शुक्रवार सुबह साढ़े आठ बजे पुलिस की मौजूदगी में लगभग दर्जनभर उपद्रवी एक धर्मस्थल पर पहुंचे, वहां तोड़फोड़ कर दी। इसके बाद भाग गए। पुलिस और प्रशासन इसकी मरम्मत में लगा था। इसी बीच साढ़े दस बजे वहां से एक किमी दूर कस्बे की खटीक बस्ती में पुरा पर खेत में बने धर्मस्थल में जमकर तोड़फोड़ हुई। दोपहर में कस्बे से आठ किमी दूर स्थित नया बास गांव के पास मजार पर तोड़फोड़ के बाद पास में बने कमरे की छत तोड़ दी। वहां रखे कपड़ों में आग लगा दी। दोपहर तीन बजे कस्बे से आगरा की ओर छह किमी दूर स्थित ऊंचा गांव स्थित मजार में तोड़फोड़ कर दी। शाम तक कस्बे और आसपास के गांवों में हालत तनावपूर्ण थे। देर शाम सात बजे गांधी चौराहे पर अकबर के खोखे को फूंककर उपद्रवी भाग गए। दोपहर में भी इसमें आग लगाने की कोशिश की थी, लेकिन तब पुलिस आ गई थी। दमकलों ने आग बुझाई लेकिन तब तक खोका खाक हो चुका था। अल सुबह से देर रात तक कस्बे में डीआइजी लक्ष्मी सिंह, डीएम पंकज कुमार और एसएसपी राजेश डी मोदक डेरा डाले हुए थे। 

कस्बे में गुरुवार से बाजार बंदी का असर शुक्रवार को देखने को मिला। शुक्रवार को कस्बे में दूध की सप्लाई भी नहीं हुई। ऐसे में लोग दूध के लिए भटकते दिखाई दिए। रामनिवास का कहना था कि पुलिस घर से नहीं निकलने दे रही है। बाजार बंद हैं। ऐसे में बच्चे दूध के लिए तरस रहे हैं। कस्बे के किसी मोहल्ले में दुकानें नहीं खुलीं। जो दुकानें खुली मिलीं, पुलिस ने उन्हें बंद करा दिया। बलवे के बाद कस्बे में सुबह अखबार भी ब्लैक में बिके। बताया जा रहा है कि कुछ भाजपा नेताओं ने गुरुवार की सुबह से ही बाजार बंद करा दिए थे। दोपहर बाद टोला मोहल्ला में हुए सांप्रदायिक संघर्ष के बाद तो इक्का दुक्का दुकानें भी पुलिस ने बंद करा दीं। ठेल-ढकेल वाले भी नहीं आए। शुक्रवार को पूरे कस्बे के बाजार बंद रहे। गांवों में धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की घटना के बाद पुलिस ने सड़कों पर वाहनों का आवागमन बंद करा दिया। 

शमसाबाद मुख्य बाजार से लेकर गांधी चौक, राजा खेड़ा रोड और अन्य रास्तों पर बैरियर लगाकर पुलिस बल तैनात कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने बाइक सवारों को भी निशाना बनाया। कई युवकों को हिरासत में ले लिया गया। घरों के बाहर बैठे लोगों को भी नहीं बख्शा। नर्सिंग होम और कोचिंग इंस्टीट्यूटों पर भी पुलिस का डंडा चला। पुलिस ने कोचिंग में पढ़ने आए छात्रों को हिरासत में ले लिया। इसके बाद एक नर्सिंग होम के बाहर भीड़ देखकर पुलिस ने नर्सिंग होम में मरीजों के साथ आए तीमारदारों को उठाना शुरू कर दिया। इससे लोगों में दहशत फैल गई। कस्बे में अफवाह फैली कि पुलिस ने कर्फ्यू लगा दिया है। लेकिन अधिकारियों ने साफ किया कि कर्फ्यू नहीं लगाया गया है। केवल धारा 144 का पालन कराया जा रहा है। अघोषित कर्फ्यू के चलते लोग घरों में कैद होकर रह गए। पुलिस की इस कार्रवाई से कस्बावासियों में आक्रोश व्याप्त है।

बताया जा रहा कि तनाव के बाद शमसाबाद में हालातों का जायजा लेने जा रहे सांसद चौधरी बाबूलाल को उनके समर्थकों के साथ पांच किलोमीटर पहले बाकलपुर पर ही रोक दिया। उपद्रव बढ़ने की आशंका के चलते पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगे नहीं जाने दिया। उनके आने की सूचना मिलते ही बाकलपुर छावनी बन गया था। चौधरी बाबूलाल ने अधिकारियों को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया। कहा कि निर्दोषों को नहीं छोड़ा गया और दोषियाें को गिरफ्तार नहीं किया गया तो भाजपा गांव-गांव पंचायत कर शमसाबाद में महापंचायत के लिए कूच करेगी। शुक्रवार दोपहर सांसद चौधरी बाबूलाल, भाजपा प्रदेश मंत्री रामप्रताप सिंह चौहान, प्रशांत पौनिया, श्याम भदौरिया, डा. रामबाबू हरित, ऋषि उपाध्याय, वीरेंद्र अग्रवाल, मोहन सिंह चाहर आदि के साथ शमसाबाद जा रहे थे। उनका काफिला बाकलपुर पहुंचा ही था कि यहां पहले से मौजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया।

शमसाबाद बवाल प्रकरण में भाजयुमो जिलाध्यक्ष सोनू चौधरी का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने शुक्रवार तड़के लोहामंडी थाना स्थित आवास में उनके न मिलने पर उनकी मां को हिरासत में ले लिया। और थानेे लाकर बैठा लिया। आरोप है कि इसके बाद उनकी कार को भी पंक्चर कर दिया। इसकी जानकारी पर सांसद चौधरी बाबूलाल आ गए। भाजपाइयों ने प्रदर्शन किया। इसके बाद ही उन्हें छोड़ा गया। भाजयुमो जिलाध्यक्ष का परिवार लोहामंडी थाना परिसर स्थित पुलिस आवास में रहता है। शुक्रवार तड़के तकरीबन पांच बजे लोहामंडी पुलिस उनके आवास पर पहुंची। पुलिस ने सोनू के नहीं मिलने पर उनकी मां विद्या सिंह को हिरासत में ले लिया। थाने में लाकर बैठा दिया। आरोप है कि उनसे मकान भी खाली करने के लिए बोला। जानकारी पर पहुंचे सांसद ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। 

शमसाबाद। पुलिस ने टोला मोहल्ला में हुए उपद्रव के मामले में दर्ज कराए मुकदमे में सद्दाम, लाला, आमिर, रिजवान, बबलू, बंटी, भप्पा, शहजाद, सुनील, रामलाल, संता, विकास, साहब सिंह, भाजपा के नगर अध्यक्ष मेघ सिंह, दिनेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। 52-52 लोगों को नामजद और 400 अज्ञातों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। उधर, पुलिस ने उपद्रव में गिरफ्तार किए सुनील, विकास, संता, मेघ सिंह, शहजाद, रामलाल को एसीजेएम कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेजा गया। शुक्रवार को भी पुलिस ने दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में ले लिया। 

एसएसपी राजेश डी मोड़क ने लोगों से अपील की है कि वे किसी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं दें। कुछ लोग अफवाहें फैलाकर अमन चैन बिगाड़ना चाहते हैं। त्योहार का सीजन है। लोग किसी के बहकावे में नहीं आएं। शमसाबाद में शांति है। पुलिस प्रशासन अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई करेगा। सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी कर सौहार्द बिगाड़ने वालों पर नियंत्रण को यूपी पुलिस की तकनीकी सेवा मुख्यालय के नेटवर्क ऑपरेटिंग सेंटर से लिंक एक व्यवस्था की गई है। इसके जरिए ऐसे लोगों पर नजर रखी जाएगी। लोगों से अपील है कि यदि किसी भी प्रकार का लेख और सूचना प्राप्त होती है तो मो. 949440-1002 पर व्हाट्स एप के माध्यम से सूचित कर सकते हैं।

उधर, राष्ट्रीय सर्वदलीय मुस्लिम एक्शन कमेटी ने शमसाबाद में हुए बवाल की कड़े शब्दों निंदा की। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की कहा। प्रशासन को अपना काम करने देने की कहा। वहीं इस्लामिया लोकल एजेंसी ने शाही जामा मस्जिद में जुमे की नमाज के बाद शांति के लिए दुआ की। आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और अमन की दुआ करने वालों में असलम कुरैशी, शरीफ कुरैशी, हाजी बिलाल, अमजद कुरैशी, अदनान कुरैशी, हाजी कदीर, आदि शामिल थे।

इतिहास हो जाएगी ब्रितानी काल की आगरा की ट्रेन

ब्रिटिश हुकूमत काल की एक और बचीखुची निशानी इतिहास के किताबों में समाने जा रही है। धौलपुर से आगरा के टनटपुर तक 65 किलोमीटर लंबी संकरी रेल लाइन (नैरोगेज) पर चलने वाली ट्रेन के दिन गिनती के बचे हैं। शताब्दी पुरानी इसी रेल मार्ग से दिल्ली में भारतीय सत्ता की शक्ति के प्रतीक राष्ट्रपति भवन और संसद भवन के निर्माण में धौलपुर के मशहूर पत्थर ढोए गए थे। अब यह रेल मार्ग आधुनिक और उन्नत युग के रेल मार्ग से जुड़ने जा रहा है।

उत्तर मध्य रेलवे ने इस रेल लाइन के गेज परिवर्तन की योजना बनाई है और इस वर्ष के रेल बजट में धौलपुर और सीर मथुरा के बीच काम शुरू करने के लिए 212 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। ढाई फीट चौड़ी रेल लाइन की जगह ब्रॉड गेज लाइन बिछाई जाएगी।

चूंकि ट्रेन अब इतिहास बनने जा रहा है, इसलिए इलाके के लोग वीतराग से भरे हैं। क्षेत्र के एक वरिष्ठ पत्रकार राजीव सक्सेना ने कहा कि वे धीमी गति की ट्रेन की कमी महसूस करेंगे। सक्सेना ने कहा, "धीमी गति का यह अपूर्व अनुभव अब खत्म हो जाएगा।" श्री मथुरा राजघराने के राव नरेंद्र सिंह ने कहा, "एक आलसी की तरह इसकी चाल धीमी होती है। आप इससे उतरकर फिर वापस चढ़ सकते हैं और इसकी छत पर सफर करने का अलग ही मजा है।"

उन्होंने बताया, "1950 के आखिर में धौलपुर जाने के लिए हम इस ट्रेन को श्री मथुरा में पकड़ते थे। श्री मथुरा ही बाद में सीर मथुरा हो गया।" राव नरेंद्र सिंह ने बताया, "ब्रिटिश अपनी राजधानी कोलकाता से दिल्ली लाना चाहते थे और इसीलिए उन्होंने इस इलाके में रेल का जाल बिछाया ताकि दिल्ली में सरकारी भवन बनाने के लिए धौलपुर के पत्थर ढोए जा सकें।"

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