खौफ के साये में रही बच्चियां!

हर रोज एक बच्ची अपना बचपन खो रही थी, हर दिन किसी न किसी बच्ची की अस्मत लूटी जा रही थी। कुछ बदकिस्मत बच्चियां बार-बार किसी हैवान की हैवानियत का शिकार हो रही थीं। दर्द पूछने वाला कोई नहीं था, कहती भी तो किससे? अपने उस गुरु से जो 'सेक्स एजुकेशन' के नाम पर उनके साथ यह घिनौना काम कर रहा था या उन चौकीदारों से जो उनके शरीर से खेल रहे थे। न जाने खौफ के किस भयानक साये में रहती रही होंगी वे बच्चियां!

एक बार, दो बार ऐसा करने के बाद उनकी हिम्मत बढ़ी। आश्रम के चौकीदार और अन्य लोगों को विश्वास में लिया। बदले में उन्होंने भी 'सेक्स एजुकेशन' का घिनौना खेल शुरू किया। जिसमें आश्रम की इंचार्ज ने उनका पूरा साथ दिया। उन सभी को लग रहा था कि गांव की डरी हुई बच्चियां हैं, कभी कुछ कहेंगी नहीं और इनका मतलब निकलता रहेगा।

इस धृणित अपराध में गांव के स्कूल का शिक्षाकर्मी भी शामिल था। कभी बारिश के बहाने तो नासाज तबियत के बहाने वह आश्रम में अक्सर रुक जाता था और आश्रम की बच्चियों को अपनी हवस का शिकार बनाता था। उन्हें डरा धमका कर मुंह न खोलने की हिदायत तो देता ही था, यह भी कहता था कि यह सब सेक्स एजुकेशन का हिस्सा है। जो सबको करना पड़ता है।

शिक्षा कर्मी और अन्य लोगों द्वारा कांकेर के झलियामारी आश्रम में रहने वाली 13 नाबालिग बच्चियों के साथ दुष्कर्म के मामले ने देश ही नहीं पूरी दुनिया को सकते में ला दिया था। दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म के बाद सामने आये इस मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था। कांकेर के डीजे कोर्ट ने इस मामले में 8 लोगों को आरोपी करार दिया है जिन पर अंतिम फैसला आज कांकेर जिला अदालत ने सुनाया। कोर्ट ने इस मामले में मन्नूलाल गोटा और दीनानाथ नागेश को प्रमुख और छह अन्य लोगों को सहयोगी दोषी करार दिया।

कई नेता, मीडिया चैनल्स, अध्यात्म गुरु मामले का जायजा लेने झलियामारी पहुंचे थे। इसके साथ ही राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप का दौर भी शुरू हो गया था। राज्य सरकार पर मामले को दबाने का आरोप भी लगाया गया। कांकेर शहर से 20 किलोमीटर दूर एक छोटा-सा गांव है झलियामारी। यहां छत्तीसगढ़ आदिमजाति कल्याण विभाग द्वारा छात्राओं के लिए एक आश्रम संचालित किया जा रहा था। यह आश्रम एक कच्चे मकान में बिना चारदीवारी, बिना पेयजल सुविधा, बिना किसी सुरक्षा के संचालित किया जा रहा था। 

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