22 अप्रैल, 2015

स्वाद और सेहत का खजाना है सलाद

सलाद हमारे भोजन में बहुत महत्व रखता है। सलाद खाने से हमारे शरीर को सारे पौष्टिक तत्व मिलते हैं। इसीलिए इसे रात को खाना खाने से पहले या खाने के साथ खाना चाहिए। सलाद पेट तो भरता ही है ज्यादा खाना खाने से भी बचाता है। संतुलित भोजन के सेवन से संक्रामक रोगों से जहां बचा जा सकता है वहां पौष्टिक तत्वों के सेवन से शरीर का सुचारू रूप से विकास भी होता है। अनियमित भोजन से मनुष्य विभिन्न रोगों का शिकार हो जाता है जो अंत में उग्र रूप धारण कर लेते हैं। सलाद का भोजन के साथ प्रमुख स्थान होने का मुख्य कारण इसमें सभी विटामिनों, पौष्टिक तत्वों, लोहा, फास्फोरस, गंधक, कार्बोहाइड्रेट्स, वसा, प्रोटीन आदि का होना है।

हरी मिर्च, मूली, गाजर, टमाटर, बंदगोभी, प्याज, नींबू, अदरक आदि के कच्चा खाने पर मूल रूप से अधिक से अधिक विटामिन प्राप्त हो जाते हैं जो स्वास्थ्य बनाये रखने हेतु लाभदायक हैं। सब्जियों को उबाल कर बनाने से विटामिन्स नष्ट हो जाते हैं अथवा शरीर को आवश्यकतानुसार नहीं मिल पाते। यदि सलाद के साथ-साथ पोदीन की चटनी का सेवन करें तो यह अति गुणकारी होता है। इससे पाचन क्रिया सुदृढ़ होती है। भोजन शीघ्र पचता है। मूली से विटामिन बीसी और गाजर से विटामिन एसी लोहा तथा शलजम से विटामिन बी, सी, अधिक एवं वसा की कम प्राप्ति होती है। प्याज में विटामिन बीसी गंधक, फास्फोरस पर्याप्त मात्रा में मिलता है। बंदगोभी से तो विटामिन ए, बीसी, के अतिरिक्त कार्बोहाइड्रेट्स, लवण और वसा की प्राप्ति में बहुत लाभ है। टमाटर से भी एबीसी के साथ कार्बोज, प्रोटीन, वसा आदि प्राप्त होता है। नींबू से भरपूर विटामिन सी मिलता है। चुकंदर तो पूर्ण स्वास्थ्यवर्ध्दक है।

चुकन्दर, मूली, शलजम आदि के मुलायाम पत्तों को भी सलाद रूप में सेवन करने से सर्वाधिक विटामिन मिलते हैं। वृध्दावस्था में सलाद का खाना एक समस्या बन जाता है। इसके लिये सलाद को जहां तक हो सके, तरल एवं बारीक बनाया जा सकता है। मूली, गाजर, शलजम, अदरक आदि को कसकर और टमाटर का जूस निकाल कर आसानी से सलाद के रूप में सेवन किया जा सकता है। अतः सलाद बच्चों, बूढ़ों, जवानों एवं महिलाओं आदि के लिये सेवन करना अति गुणकारी है क्योंकि यह स्वयं में एक वैद्य है। यह शरीर में सभी कमियों को दूर कर रक्त को शुध्द कर पूर्ण स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है जिसके कारण मानव अनेक रोगों का शिकार हो जाता है।

गर्भावस्था के दौरान भी सलाद के पत्ते खाना बहुत लाभदायक होता है। कम कैलोरी में इससे ज़्यादा ख़ुराक मिल जाती है। विशेष रूप से इसमें मौजूद फोलिक एसिड, जिसकी गर्भावस्था के समय तथा बाद में भी शरीर को आवश्यकता रहती है, अच्छी मात्रा में पाया जाता है। फोलिक एसिड मेगालोब्लास्टिक एनिमिया को रोकता है। तथा जिनमें बार बार गर्भपात की संभावना रहती है उन्हें भी कच्चे सलाद के पत्ते खाने की सलाह दी जाती है। कच्चे सलाद के पत्ते खाने से महिलाओं के शरीर में प्रोजेस्टेरोन होरमोन के स्राव पर भी प्रभाव पड़ता है। भोजन के तुरंत बाद सलाद के पत्ते चबाने से दाँतों की बहुत सी बीमारियों जैसे गिंगिविटिस, पायरिया, हेलीटोसिस, स्टोमेटिटिस आदि से निजात मिल सकती है। जिह्वा पर उपस्थित स्वादग्राही तंतुओं तथा इनेमल के क्षय में भी रूकावट पड़ती है। प्रतिदिन आधा लीटर सलाद के पत्ते तथा पालक के रस को पीने से बालों का झड़ना भी कम होता है। 

खीरे का सलाद कब्ज दूर करता है। पीलिया, प्यास, ज्वर, शरीर की जलन और गर्मी की सारी समस्याओं को दूर करता है तथा इससे चर्म रोगों में लाभ पहुंचता है। यदि आपके सलाद में टमाटर भी है तो इससे शरीर में विटामिन ए की कमी को पूरा किया जा सकता है। कच्चा टमाटर खाने से कब्ज़ दूर होती है। यह पाचन शक्ति को बढ़ाता है और रक्त चाप तथा मोटापे को कम करने में भी सहायक सिद्ध होता है। यदि सलाद में खीरे और टमाटर के अतिरिक्त ककड़ी भी हो तो बहुत अच्छी बात है क्योंकि इसमें पोटेशियम तत्व बहुत मिलते हैं।

रोजाना विटामिन सी के सेवन से कैंसर व हृदय रोगों का जोखिम कम हो जाता है। ये इम्यूनिटी के लिए भी महत्वपूर्ण हैं और इन्हीं की बदौलत सर्दी ज़ुकाम तथा वायरसों के अन्य हमलों की अवधि व गंभीरता में कमी आती है। ताजा फलों व सब्जियों में शक्तिशाली एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं, जैसे विटामिन ए और सी, जो हृदयरोग व कैंसर से बचाव करते हैं। सलाद के पत्ते जैसे कि लैटूयूस में कैलोरी कम होती है और इनमें 90 प्रतिशत पानी होता है; लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि इसमें कई महत्वपूर्ण विटामिन व खनिज होते हैं, जैसे कि कैल्शियम, तांबा, पोटेशियम, आयरन, विटामिन ए और सी।

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