20 जून, 2013

धर्मनगरी की सैर

धर्मनगरी के नाम से विख्यात विश्व के प्राचीनतम शहरों में से एक वाराणसी हमेशा से पर्यटकों का पसंदीदा स्थल रहा है। यहां गंगा नदी के घाट, मंदिर और प्राचीन संस्कृति हर पर्यटक का मन मोह लेती है। गर्मी की छुट्टियां बिताने की योजना बना रहे लोगों के लिए वाराणसी की सैर करना आनंददायक अनुभव होगा।

वाराणसी को बनारस और काशी के नाम से भी जाना जाता है। यह उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्से में स्थित है। वाराणसी की संस्कृति का गंगा नदी एवं इसके धार्मिक महत्व से अटूट रिश्ता है। यह शहर सैकड़ों वर्षो से भारत का, विशेषकर उत्तर भारत का सांस्कृतिक एवं धार्मिक केंद्र रहा है। हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का बनारस घराना वाराणसी में ही जन्मा एवं विकसित हुआ है। भारत के कई दार्शनिक, कवि, लेखक, संगीतज्ञ वाराणसी में हुए।

धर्मनगरी में कई दर्शनीय और पौराणिक स्थल हैं जो देश-विदेश के पर्यटकों को अपनी तरफ आकृष्ट करते हैं। इनमें से प्रमुख हैं काशी विश्वनाथ मंदिर, जिसे भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिग में से माना जाता है। इसके अलावा अन्नपूर्णा मंदिर, साक्षी गणेश मंदिर, विशालाक्षी मंदिर, संकट मोचन मंदिर और लोलार्क कुंड व दुर्गा कुंड का भक्तिमय माहौल पर्यटकों को बहुत भाता है।

वाराणसी का जिक्र बिना इसके घाटों के अधूरा है। यहां गंगा नदी पर लगभग 84 घाट हैं। ये घाट लगभग चार मील लंबे तट पर बने हुए हैं। इन 84 घाटों में पांच घाट बहुत ही पवित्र माने जाते हैं। इन्हें सामूहिक रूप से 'पंचतीर्थी' कहा जाता है। ये हैं अस्सी घाट, दशाश्वमेध घाट, आदिकेशव घाट, पंचगंगा घाट तथा मणिकर्णिका घाट। अस्सी घाट सबसे दक्षिण में स्थित है, जबकि आदिकेशव घाट सबसे उत्तर में स्थित है।

दशाश्वमेध घाट पर हर रोज सुबह और शाम को होने वाली गंगा आरती का दृश्य बहुत ही मनोरम होता है। सैकड़ों की संख्या में रोज साधु-संत, पुजारी और स्थानीय लोग और पर्टयक गंगा आरती में हिस्सा लेते हैं। वाराणसी बौद्ध धर्म के पवित्रतम स्थलों में से एक है। वाराणसी से करीब 10 किलोमीटर दूर सारनाथ है, जहां भगवान गौतम बुद्ध ने अपना प्रथम प्रवचन दिया था। इसमें उन्होंने बौद्ध धर्म के मूलभूत सिद्धांतों का वर्णन किया था। वाराणसी हिंदुओं एवं बौद्धों के अलावा जैन धर्म के अवलंबियों के लिए भी पवित्र तीर्थ है। इसे 23वें र्तीथकर पाश्र्वनाथ का जन्मस्थान माना जाता है।

वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय और संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय स्थित है, जो देश के प्रसिद्ध उच्च शिक्षण संस्थानों में शामिल हैं। यहां पर करीब छह पांच सितारा होटल और दर्जनों धर्मशालाएं हैं, जहां पर्यटक वाराणसी प्रवास के दौरान ठहरते हैं। वाराणसी लगभग देश के सभी प्रमुख शहरों से रेल और हवाई यातायात से जुड़ा है। 

पर्दाफाश से साभार

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