31 अगस्त, 2013

मुस्लिमों को लुभाने के लिए सपा का ट्रंप कार्ड

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तर प्रदेश में मुसलमान मतदाताओं को अपने पाले में करने की खींचतान के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने ट्रंप कार्ड चल दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव की सरकार ने सरकारी योजनाओं में अल्पसंख्यकों को आरक्षण देने का निर्णय किया है। सरकार की इस निर्णय को मुसलमान मतदाताओं को लुभाने के कदम के रूप में देखा जा रहा है। 

बीते सप्ताह सपा सरकार ने राज्य सरकार द्वारा संचालित 30 विभागों की 85 योजनाओं में अल्पसंख्यकों को 20 प्रतिशत आरक्षण देने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की तरफ से इस निर्णय के पीछे तर्क दिया गया कि अल्पसंख्यक वर्ग को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए शैक्षिक, आर्थिक व सामाजिक दूष्टि से विभिन्न आयोगों द्वारा विचार किया गया। यह आवश्यकता अनुभव की जा रही थी कि उन्हें भी समाज के अन्य वर्गो की भांति अवसर उपलब्ध कराते हुए सभी प्रकार की सुविधाएं इस प्रकार सुलभ कराई जाएं कि इन समुदायों को भी पिछड़ेपन से मुक्त करते हुए समाज की मुख्यधारा में लाया जा सके।

उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यक आबादी करीब 19 प्रतिशत है, जिसमें से करीब 16 प्रतिशत मुसलमान हैं। राज्य की करीब 30 लोकसभा सीटें ऐसी जहां पर मुसलमान नतीजों को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में सपा उन्हें अपने पाले में रखना चाहती है। कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार, बिजली संकट, बाढ़ जैसे तमाम मुद्दों पर घिरी अखिलेश सरकार का ये कदम आगामी लोकसभा चुनाव में अल्संख्यकों, खासकर मुसलमानों को खुश करने के रूप में देखा जा रहा है।

दरअसल, सपा को अंदेशा है कि विधानसभा चुनाव में सपा को वोट देने वाले मुस्लिम मतदाता का मूड लोकसभा चुनाव के समय बदल सकता है। वे सपा को अनदेखा कर कांग्रेस की तरफ जा सकते हैं, इसलिए सपा नेतृत्व ने आरक्षण का निर्णय लेकर बड़ा ट्रंप कार्ड खेला है।

सपा के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी कहते हैं कि यह किसी का तुष्टीकरण नहीं, बल्कि समाज के पिछड़ों और वंचितों को विशेष अवसर देने के राम मनोहर लोहिया के सिद्धांत को अमली जामा पहनाने का प्रयास है। इसे वोट बैंक की राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।

वह कहते हैं कि कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने अपने शासनकाल में मुस्लिमों का इस्तेमाल सिर्फ वोट बैंक की तरह किया और भाजपा का तो मुस्लिम विरोध जगजाहिर है। ताजा राजनीतिक हालात में पार्टी नेतृत्व को लगता है कि अगर मुसलमान और पिछड़ा वर्ग सपा के साथ रहा तो लोकसभा सीटें जीतने में उसकी स्थिति नंबर एक पर रहेगी। अखिलेश द्वारा हाल में पिछड़े वर्ग के चार नेताओं को कैबिनेट मंत्री का पद देने से ऐसे संकेत मिलते हैं। 

उधर, कांग्रेस पार्टी का आरोप है कि अल्पसंख्यक समुदाय में सरकार के विरुद्ध बढ़ती हुई नाराजगी और आने वाले लोकसभा चुनाव में अल्पसंख्यक वोटों के खिसकने के डर से सपा सरकार ने 20 प्रतिशत भागीदारी देने के नाम पर प्रदेश के अल्पसंख्यक समाज पर डोरा डाला है।

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता मारूफ खान कहते हैं कि विधानसभा चुनाव में सपा ने अपने घोषणापत्र में मुसलमानों को 18 प्रतिशत आरक्षण देने की बात कही थी जिसे पूरा न किए जाने से मुसलमानों में बढ़ती नाराजगी और अल्पसंख्यक हितों से जुड़े तमाम मुद्दों से अल्पसंख्यक समुदाय का ध्यान हटाने के लिए यह सिर्फ एक शिगूफा है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश प्रवक्ता विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि सपा अल्पसंख्यकों के हित के नाम पर केवल मुस्लिम वर्ग को लाभ पहुंचाकर तुष्टीकरण की नीति पर काम कर रही है। उसका मकसद मुसलमानों का भला नहीं, बल्कि उनका वोट लेना है।

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