16 सितंबर, 2013

विश्व ओजोन दिवस विशेष: पूरे वर्ष ओजोन को याद रखना होगा

किसी व्यवस्था में छेद होने से पहले हमारे विचारों में छुद्रता आती है। और इस वैचारिक छुद्रता का अर्थ यह होता है कि कि हमारे पतन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। और इस पतन का ही परिणाम है कि आज राजनीति से लेकर समाज, अर्थव्यवस्था और हमारा पर्यावरण, सबकुछ छलनी हो चला है।

हमने ओजोन की उस छतरी में भी छेद कर डाला है, जो सूरज की खतरनाक किरणों से हमें अब तक बचाती रही है। चिंता की बात यह कि अब यह छेद सिर्फ छेद नहीं, हमारे अस्तित्व के लिए अंतहीन सुरंग बनने की ओर बढ़ चला है। नासा के औरा उपग्रह से प्राप्त आंकड़े के अनुसार ओजोन छिद्र का आकार 13 सितंबर, 2007 को अपने चरम पर पहुंच गया था, कोई 97 लाख वर्ग मील के बराबर। यह क्षेत्रफल उत्तरी अमेरिका के क्षेत्रफल से भी अधिक है। 12 सितंबर, 2008 को छेद का आकार और बढ़ गया। ओजोन परत अभी भी खतरनाक स्थिति में है।

वायुमंडल में मौजूद ओजोन की चादर लगातार झीनी हो रही है। सूरज से निकलने वाली खतरनाक पराबैंगनी किरणें हमारे अस्तित्व को छेद रही हैं। लेकिन इसके लिए कोई और नहीं, खुद हम, हमारी सोच और हमारी जीवनशैली जिम्मेदार है। आज हमें त्वचा कैंसर, त्वचा के बूढ़ा होने और आंखों की खतरनाक बीमारियों के खतरों से दो-चार होना पड़ रहा है।

ओजोन की छतरी में छेद के लिए जिम्मेदार है, क्लोरोफ्लोरोकार्बन गैस, और आज हमारे जीवन में इस गैस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है। रेफ्रीजरेटर से लेकर एयरकंडीशनर तक इसी गैस पर निर्भर हैं और हम इन उपकरणों पर। हमें इन उपकरणों से बचना होगा, क्योंकि इन्हीं के जरिए सीएफसी वातावरण में घुल रही है। लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि सीएफसी के उत्पादन और इस्तेमाल पर आज से पूर्ण प्रतिबंध भी लगा दिया जाए, तो भी ओजोन क्षरण की समस्या बनी रहेगी। क्योंकि वातावरण में पहले से मौजूद सीएफसी को साफ करने का कोई तरीका अभी तक नहीं ढूढ़ा जा सका है और यह अगले 100 सालों तक इसी तरह वातावरण में बनी रहेगी। लेकिन बड़ा सवाल तो यह है कि क्या सीएफसी पर पूर्ण प्रतिबंध संभव है?

मांट्रियल प्रोटोकाल से जुड़े 30 देशों ने सीएफसी के इस्तेमाल में कमी लाने पर सहमति जताई है। लेकिन यह कमी कितनी होगी, इसका कोई आंकड़ा स्पष्ट नहीं है। वर्ष 2000 तक अमेरिका तथा यूरोप के 12 राष्ट्र सीएफसी के इस्तेमाल और उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने पर सहमत हो गए थे। इसे एक बड़ी उपलब्धि मानी गई थी, क्योंकि ये देश दुनिया में उत्पादित होने वाले सीएफसी का तीन चैथाई हिस्सा पैदा करते हैं। लेकिन प्रश्न यह है कि इन देशों ने अपनी सहमति को साकार कितना किया?

ओजोन छिद्र से घायल हुआ अमेरिका :

अमेरिका ओजोन के छेद से सबसे पहले घायल हुआ है, क्योंकि ओजोन की चादर में पहला छेद अंटार्कटिक के ठीक ऊपर बना। यह छेद न केवल इस महाद्वीप के लिए खतरनाक है, बल्कि कई अन्य महाद्वीपों के लिए भी। क्योंकि अंटार्कटिका की बर्फ पिघलने के कारण कई सारे देशों के जलमग्न होने का खतरा पैदा हो गया है।

अंटार्कटिका के ऊपर इस ओजोन छिद्र का पता 1985 में ब्रिटिश वैज्ञानिक जोसेफ फारमैन, ब्रायन गार्डनर और ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के जोनाथन शंकलिन ने लगाया था। इसके पहले वायुमंडल में ओजोन की चादर की खोज वर्ष 1913 में फ्रेंच वैज्ञानिकों, चार्ल्स फैब्री और हेनरी बूइसॉ ने की थी। पृथ्वी से 30 मील ऊपर तक का क्षेत्र वायुमंडल कहलाता है और वायुमंडल के सबसे ऊपरी हिस्से में ओजोन गैस की पर्त है।

ओजोन नीले रंग की गैस होती है। ओजोन में ऑक्सीजन के तीन परमाणु मिले हुए होते हैं। हमें श्वसन क्रिया के लिए जिस ऑक्सीजन की जरूरत होती है, उसमें ऑक्सीजन के दो परमाणु ही होते हैं। लिहाजा ओजोन गैस प्रत्यक्ष रूप में हमारे जीवन के लिए खतरनाक है। सीएफसी से निकलने वाली क्लोरीन गैस ओजोन के तीन ऑक्सीजन परमाणुओं में से एक परमाणु से अभिक्रिया कर जाती है। यह प्रक्रिया जारी रहती है, और इस तरह क्लोरीन का एक परमाणु ओजोन के 100,000 अणुओं को नष्ट कर डालता है।

ओजोन क्षरण से बीमारियों का खतरा :

अमेरिका की एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी (ईपीए) के अनुसार ओजोन क्षरण के कारण, वर्ष 2027 तक पैदा होने वाले छह करोड़ अमेरिकी, त्वचा कैंसर से पीड़ित होंगे। इनमें से लगभग 10 लाख लोग बेमौत मारे जाएंगे। कुछ अनुसंधानों में कहा गया है कि कैंसर के अलावा मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाएगा।

ईपीए के अनुसार ओजोन क्षरण के कारण मोतियाबिंद के 1.70 करोड़ नए मामले सामने आ सकते है, वृक्षों का जीवन चक्र बदल सकता है, खाद्य श्रृंखला बिगड़ सकती है। इसका असर पशुओं पर भी पड़ेगा। इसके अलावा और क्या-क्या समस्याएं पैदा होंगी, कहना कठिन है।

समुद्र बुरी तरह प्रभावित होगा। अधिकांश समुद्री सूक्ष्म जीव समाप्त हो जाएंगे। यदि ऐसा हुआ तो वे सभी जंतु भी मर जाएंगे जो खाद्य श्रृंखला में सूक्ष्म जीवों पर निर्भर होते हैं। जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय समिति (आईपीसीसी) की हाल की रिपोर्ट में कहा गया है कि ओजोन क्षरण के कारण धरती का तापमान पिछले 100 सालों में 0.74 प्रतिशत बढ़ गया है। और इसका प्रभाव घातक है।

सीएफसी पर लग पाएगा पूर्ण प्रतिबंध? :

ओजोन की चादर को तार-तार होने से बचाने के लिए सीएफसी के इस्तेमाल पर पूर्ण प्रतिबंध के अलावा फिलहाल और कोई रास्ता नहीं है। इसी बारे में जागरूकता फैलाने के लिए 16 सितंबर, 1995 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहल पर मांट्रियल प्रोटोकॉल पर 191 देशों ने सहमति जताई थी। प्रोटोकाल के तहत सभी सदस्य देशों को सीएफसी के उत्पादन और इस्तेमाल में कमी लाने के लिए अपने-अपने स्तर पर उपाय करने थे।

इसी सहमति के समर्थन में अब हर वर्ष 16 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय ओजोन दिवस मनाया जाता है। लेकिन सवाल यह भी है कि क्या साल में एक दिन का समारोह मना लेने से यह समस्या सुलझ जाएगी? जवाब होगा नहीं! लिहाजा यदि हम वाकई समाधान के प्रति गंभीर हैं, तो हमें साल के 365 दिन ओजोन को याद रखना होगा। और इसके लिए सबसे पहले हमें अपनी सोच और जीवन शैली में बदलाव लाना होगा। कई सारे छोटे-बड़े उपाय अपनाने होंगे।

अधिक से अधिक पेड़ लगाने होंगे, ऊर्जा की खपत घटानी होगी, पर्यावरण अनुकूल उत्पादों और वस्तुओं का इस्तेमाल करना होगा, स्थानीय स्तर पर जागरूकता फैलानी होगी। तो आइए हम सभी मिल कर इस उद्देश्य के लिए अभी से संकल्प लें। 

www.pardaphash.com

कोई टिप्पणी नहीं:

loading...
loading...