23 सितंबर, 2013

छत्तीसगढ़ के राजिम में मिला छठी शताब्दी का शिवमंदिर

छत्तीसगढ़ के राजिम में पुरातत्व विभाग की ओर से राजीव लोचन मंदिर के पास की जा रही खुदाई में छठी शताब्दी का एक शिव मंदिर मिला है। खुदाई में और भी कई पुरातात्विक अवशेष सामने आ रहे हैं। खुदाई स्थल से प्राचीन इमारतों के अवशेष मिलने का दावा करने वाले अधिकारी अब उसे छठी शताब्दी का पांडुकाल के दौरान निर्मित शिव मंदिर बता रहे हैं।

पुरातत्व अवशेषों को देखने के लिए वहां बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। पिछले 18 दिनों से चल रही खुदाई में करीब 10 फुट गहराई तक खुदाई की जा चुकी है। पुरातत्व विभाग को 30 सितंबर तक खुदाई की अनुमति मिली है। 25 सितंबर को नई दिल्ली में पुरातत्व विभाग के उच्चाधिकारियों की बैठक होने वाली है। उम्मीद है कि इसमें खुदाई की तारीख आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी।

बताया जाता है कि राजीव लोचन मंदिर के सामने सीताबाड़ी में 500 वर्ग फुट जगह में चार सितंबर से पुरातत्व विभाग खुदाई कर रहा है। यह काम पुरातत्व अधिकारी अरुण शर्मा के मार्गदर्शन में चल रहा है।

खुदाई के दौरान प्राचीन खंभे, सीप, बड़ा शंख, शिवलिंग, जलहरी, बिल्लस, तकली, दवाई कूटने की कुट्टी, तांबे की बाली, मिट्टी के बर्तन, नाद आदि के टुकड़े बरामद हुए हैं। 10 फीट गहराई में मंदिर का गर्भगृह मिला, जिसकी लंबाई 3.25 मीटर व चौड़ाई 2.20 मीटर है। अभी खुदाई का काम जारी है।

पुरातत्वविद् उम्मीद कर रहे हैं कि आगे की खुदाई में शिवलिंग जलहरी आदि मिल सकती है। जहां खुदाई हुई है उसके बगल में पत्थर की जोड़ाई वाली दीवार दिखाई दे रही है, जो संभवत: मंडप हो सकता है। इस मंडप की लंबाई 4.75 मीटर और चौड़ाई 3.29 मीटर है।

अरुण शर्मा ने बताया कि मंडप में एक-एक मीटर में दीवारें हैं, जिसे मजबूती के लिए बनाया गया है। ये दीवारें नदी की मुख्य धारा के समानांतर बनाई गई हैं, जिससे यह बाढ़ में भी टूटने नहीं पाए। यह पश्चिममुखी शिवमंदिर रहा होगा। पूरी दीवार को पत्थर से जोड़ा गया है। पत्थर को चिपकाने के लिए बेल का गुदा व बबूल के गोंद का गारा बनाकर पत्थरों की जोड़ाई की गई है।

मंदिर के पास ही शंख से चूड़ियां बनाने का कारखाना होने की संभावना जताई जा रही है। खुदाई के दौरान अलंकृत चूड़ियां मिल रही हैं। शर्मा का कहना है कि खुदाई की तारीख सरकार बढ़ाए और निधि आवंटित कर दे तो खुदाई का काम आगे भी जारी रखा जा सकेगा, जिससे और भी अचरज की वस्तुएं प्राप्त हो सकती हैं।

खुदाई से प्राप्त अवशेषों को सुरक्षित रखने तथा लोगों को ऐतिहासिक वस्तुओं से परिचित कराने के लिए यहां संग्रहालय के लिए भवन की मांग की जा रही है। इस बीच, सांसद चंदूलाल साहू ने खुदाई स्थल का मुआयना किया। बहरहाल, विशेषज्ञों ने इलाके में और भी जगहों पर पुरातात्विक अवशेष होने की संभावना जताई है। 

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