09 सितंबर, 2013

चाहते हैं सुख-समृद्धि तो करें श्रीगणेश के इन रूपों की पूजा

हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश बुद्धि, श्री यानी सुख-समृद्धि और विद्या के दाता हैं। उनकी उपासना और स्वरूप मंगलकारी माने गए हैं। गणेश के इस नाम का शाब्दिक अर्थ – भयानक या भयंकर होता है। क्योंकि गणेश की शारीरिक रचना में मुख हाथी का तो धड़ पुरुष का है। सांसारिक दृष्टि से यह विकट स्वरूप ही माना जाता है। किंतु इसमें धर्म और व्यावहारिक जीवन से जुड़े गुढ़ संदेश है।

धार्मिक आस्था से श्री गणेश विघ्नहर्ता है। इसलिए माना जाता है कि वह बुरे वक्त, संकट और विघ्नों का भयंकर या विकट स्वरूप में अंत करते हैं। आस्था से जुड़ी यही बात व्यावहारिक जीवन का एक सूत्र बताती है कि धर्म के नजरिए से तो सज्जनता ही सदा सुख देने वाली होती है, लेकिन जीवन में अनेक अवसरों पर दुर्जन और तामसी वृत्तियों के सामने या उनके बुरे कर्मों के अंत के लिये श्री गणेश के विकट स्वरूप की भांति स्वभाव, व्यवहार और वचन से कठोर या भयंकर बनकर धर्म की रक्षा जरूर करना चाहिए।

शास्त्रों में हर माह श्री गणेश के अलग-अलग मंगलकारी रूपों की पूजा करने का विधान बताया गया है। तो आइये जाने किस माह में गणेश जी के किस रूप की पूजा करनी चाहिए-

चैत्र माह:- हिंदी पञ्चांग के अनुसार प्रथम माह चैत्र माह होता है इस माह में भगवान गणेश वासुदेव रुप की पूजा करने व ब्राह्मण भोजन व सोने के दान का महत्व है।

वैशाख माह - वैसाख मास में श्री गणेश संकर्षण रूप की पूजा करनी चाहिए और ब्राह्मण भोजन के साथ शंख दान का महत्व है।

ज्येष्ठ माह - ज्येष्ठ माह में श्री गणेश के प्रद्युम्र रूप की पूजा करनी चाहिए और ब्राह्मण भोजन और फल दान का महत्व है।

आषाढ़ माह - आषाढ़ मास में श्री गणेश के अनिरुद्ध रूप की पूजा करनी चाहिए और ब्राह्मण भोजन और पात्र या बर्तन दान का महत्व है।

श्रावण माह - इस मास में भगवान शंकर की उपासना के शुभ काल सावन में उनके ही पुत्र गणेश के बहुला रूप में पूजा की जाती है।

भाद्रपद माह - इस मास में श्री गणेश की सिद्धि विनायक रुप में पूजा की जाती है।

आश्विन माह - आश्विन माह में श्री गणेश के कपर्दीश रूप की पूजा होती है।

कार्तिक माह - कार्तिक माह में भगवान गणेश के वरद विनायक रूप की पूजा की जाती है।

मार्गशीर्ष माह - इस माह में गजानन रूप की पूजा का महत्व है।

पौष माह - इस माह में भगवान गणेश के विघ्र विनायक रूप की पूजा की जाती है।

माघ माह - माघ मास में श्री गणेश के संकटनाशक रूप की पूजा कर संकट व्रत की शुरुआत की जाती है।

फाल्गुन माह - इस माह में भगवान गणपति के ढुंढिराज रूप की पूजा की जाती है।

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