02 अक्तूबर, 2013

गांधी से जुड़ा है पुलिसिया कार्रवाई से त्रस्त ठाकुर चौबीसी का इतिहास

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भी देश की आजादी की अलख जगाने ठाकुर चौबीसी में आए थे। अब यही ठाकुर बिरादरी रविवार की खेड़ा महापंचायत के बाद हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अपने आपको उपेक्षित महसूस कर रही है। ठाकुर विरादरी की मानें तो युवाओं को फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है, जिससे उनके भविष्य पर प्रश्न चिन्ह लग गया है। 

उत्तर प्रदेश में मेरठ जिले में स्थित सरधना विधानसभा क्षेत्र के 24 गांवों को संयुक्त रूप से ठाकुर चौबीसी कहा जाता है। इन गावों में 95 प्रतिशत आबादी ठाकुरों की है। सरधना विधानसभा की सीमा बागपत, मुजफ्फरनगर से भी लगती है। बीते रविवार आयोजित की गई महापंचात में मौजूद लोगों पर पुलिस ने जमकर लाठियां भांजी थी, जिसमें कई लोग घायल हुए थे। 

ठाकुर चौबीसी के लोगों का कहना है कि गांधी जी तो यहां आजादी की अलख जगाने आए थे, लेकिन पुलिस की इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद कोई हाल चाल पूछने तक नहीं आया। ठाकुर चौबीसी के गांव खेड़ा के हरपाल चौधरी ने बताया, "विधानसभा चुनाव हो या लोकसभा चुनाव, ठाकुरों ने एक राय होकर जिसे चाहा, उसी राजनीतिक दल को वोट दिया। अब रविवार को खेड़ा महापंचायत के दौरान पुलिसिया कहर उन पर बरसा। सैकड़ों लोग घायल हुए। पुलिस ने फर्जी मुकदमे दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी भी शुरू कर दी। चार हजार से अधिक लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए।"

रविवार की महापंचायत भाजपा विधायक संगीत सोम व सुरेश राणा पर रासुका व हिन्दुओं पर पुलिस प्रशासन द्वारा की जा रही एकपक्षीय कार्रवाई के विरोध में आयोजित की गई थी। मेरठ में भाजपा के जिलाध्यक्ष अजित चौधरी ने कहा, "महापंचायत के बाद अभी भी स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। लोग गांवों में पुलिस को घुसने नहीं दे रहे हैं।"

चौधरी ने बताया कि लोगों का आरोप है कि पुलिस ने पाली गांव में 100 बीघा गन्ने की खड़ी फसल महज इसलिए जला दी कि उसे अंदेशा था कि इसमें काफी लोग छुपे हुए हैं। चौधरी कहते हैं, "अब गांधी जी का जमाना गया। यहां लोग लाठियों से ही बात करते हैं। जिस तरह से महापंचायत में एकत्र हुए निरीह लोगों पर लाठियां बरसाई गईं, उससे काफी सबक मिला है और इसका जवाब भी उचित समय पर दिया जाएगा।"

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