05 दिसंबर, 2013

मुंबई: 8 माह, 229 रेप, 8 गैंगरेप

देश की व्यवसायिक राजधानी मुम्बई में वर्ष 2013 के पहले आठ माह में बलात्कार के 229 और सामूहिक दुष्कर्म के आठ मामले सामने आए जिनमें अधिकतर मामलों में पीड़िता आरोपी को जानती थी और उनमें से ज्यादातर ‘मित्र और प्रेमी’ या पड़ोसी थे।

सामाजिक कार्यकर्ता अनिल गलगली ने सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) के तहत ये सूचनाएं जुटायी हैं जिससे पता चला कि इस साल अगस्त तक कम से कम बलात्कार के 229 और सामूहिक बलात्कार के 8 मामले सामने आए। सामूहिक बलात्कार के मामलों में शक्ति मिल में हुई सामूहिक बलात्कार की दो घटनाएं शामिल हैं जिन्होंने देश को हिला दिया था।

सामाजिक कार्यकर्त्ता ने कहा है कि वर्ष के अंत तक इन मामलों की संख्या और बढ़ जाएगी क्योंकि केवल नवंबर में ही उपनगरीय दिनदोशी और बोरीवली इलाकों में नाबालिग लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार की दो घटनाएं हुईं। पिछले साल यहां बलात्कार के 223 मामले और सामूहिक बलात्कार के 8 मामले सामने आए थे। जबकि 2011 में बलात्कार के 211 और सामूहिक बलात्कार के 9 मामले दर्ज किए गए थे। इससे पहले 2010 में कुल 188 बलात्कार के मामले जबकि सात सामूहिक बलात्कार के मामलों का पता चला था।

मुम्बई में हो रही इस तरह की घटनों को लेकर बॉलीवुड अभिनेत्रियां भी अपने आप को असुरक्षित पाती हैं| अभी हाल ही में एक फ़ोटो जर्नलिस्ट के साथ हुए बलात्कार के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्रियों ने कुछ इस तरह अपनी प्रतिक्रिया दी थी| बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने कहा था कि हमें उस डर और अनिश्चितता के माहौल को दूर करने के लिए उपचारात्मक समाधान निकालने होंगे, जिनका महिलाओं को सामना करना पड़ता है। नहीं तो हम और अधिक आत्मकेंद्रित हो जाएंगे। वहीँ, स्वरा भास्कर का कहना था कि क्या मैं मुंबई में सुरक्षित महसूस करती हूं? हां या ना। हां, इसलिए चूंकि यहां दिन या रात किसी भी समय बाहर निकलना आसान है। और ना इसलिए क्योंकि मुंबई में मुझसे कई बार छेड़छाड़ हो चुकी है। मुंबई भी देश के अन्य राज्यों की जितनी ही असुरक्षित है।

वहीँ, सोफी चौधरी ने कहा था कि जब मैं अपनी मां के साथ लंदन से मुंबई आई तो हमने इसे लड़कियों के लिए विश्व के सुरक्षित शहरों में से एक पाया था। लेकिन अब ऐसा नहीं रहा। अगर आप अकेली लड़की हैं तो यहां आपको लगातार अपनी चौकीदारी करनी पड़ेगी। जबकि ऋचा चड्ढा का कहना था कि मुझे स्वीकार करना पड़ेगा कि यहां हमेशा सुरक्षित महसूस नहीं करती हूं। लेकिन क्या मैं किसी अन्य शहर में सुरक्षित हूं?

इसके अलावा अमृता राव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि यह शहर कामकाजी महिलाओं के लिए कतई सुरक्षित नहीं है। जब मैं शूटिंग पर होती हूं तो स्वयं को अनचाहे लोगों से बचाने के लिए अंगरक्षक रखने पड़ते हैं। मनीषा लांबा का कहना था कि यह पेचीदा सवाल है। मैं मुंबई में देश के अन्य शहरों जितना ही सुरक्षित महसूस करती हूं। तनीशा चटर्जी ने कहा था, "मैं बीते पांच वर्षो की तुलना में अब कम सुरक्षित अनुभव करती हूं।" शिल्पा शुक्ला का कहना था कि मैं जब और जहां भी हूं स्वयं को सुरक्षित महसूस करती हूं।

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