03 दिसंबर, 2013

वर्दी हुई दागदार, नौकरी का झांसा देकर डीएसपी ने किया किशोरी का बलात्कार

वर्दी लोगों की, समाज की सुरक्षा के लिए होती है। वर्दी की हनक से लोगों पर रुतबा कायम करने के लिए पुलिस अफसरों को उसकी आन बरकरार रखनी होती है लेकिन कुछ अफसर वर्दी की आड़ में ऐसा काम कर देते हैं की पूरा महकमा शर्मसार हो जाता है। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के एक डीएसपी की काली करतूत ने एक बार फिर से खाकी को शर्मसार कर दिया| ख़बरों के मुताबिक, मुसाफिरखाना की एक किशोरी ने डीएसपी विपुल कुमार श्रीवास्तव पर नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है। डीएसपी ने मुंह खोलने पर उसे, उसके पिता व भाई को मरवा देने की धमकी दी थी। सोमवार को परिजनों की शिकायत पर एसपी ने डीएसपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। किशोरी की मेडिकल जांच कराई गई है।

किशोरी ने डीएसपी पर आरोप लगाते हुए कहा है कि गलती से उसके मोबाइल से डीएसपी मुसाफिरखाना विपुल कुमार श्रीवास्तव के सीयूजी नंबर पर काल चली गई थी। इसके बाद डीएसपी ने काल बैक कर उसकी परेशानी पूछी, तो उसने कोई समस्या न कहकर फोन रख दिया। लेकिन डीएसपी ने उसे फोन लगाना जारी रखा। नौकरी लगवाने व शादी का झांसा देकर उससे बातचीत करने लगे। उससे मिलने डीएसपी उसके गांव भी आए पर मुलाकात नहीं हो सकी। उसके बाद 23 नवमबर को डीएसपी ने उसे राजधाजी लखनऊ के आलमबाग में बुलाया| किशोरी नौकरी के लालच में अपने परिजनों को बिना बताये उससे मिलने 24 नवंबर को आलमबाग गई तो डीएसपी ने उसे एक होटल में बुलाया| किशोरी का आरोप है कि वहाँ डीएसपी ने उसके साथ कई बार बलात्कार किया| पीड़िता ने जब पूरा मामला सबके सामने लाने की बात डीएसपी से कही तो वह उसके परिजनों को जान से मरवाने की धमकी देने लगे। इस बीच लड़की ने फोन करके पूरा घटनाक्रम अपने परिजनों को बताया।

तब एसओ मुसाफिरखाना मनोज तिवारी व कांस्टेबल अरुण तिवारी ने पीड़िता के पिता को मुकदमे में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस महकमा पहले तो इस मामले को दबाने में जुटा रहा लेकिन जब बात नहीं बनी तो सोमवार को एसपी ने एसो रेखा सिंह को मामला दर्ज करने के आदेस्ज दे दिए है| एसपी हीरालाल ने प्रकरण को गम्भीर बताते हुए उच्च स्तरीय जाँच करने की बात कही है| 

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश में यह कोई पहला मामला नहीं है जब खाकी दागदार हुई हो इससे पहले भी इस तरह के संगीन मामले प्रकाश में आ चुके हैं| अपराध रोकने के लिए बनाई गई खाकी को खुद खाकीधारी ही कलंकित करने में जरा भी नही चूक रहे है। इसी के चलते महिला सिपाही ने थानाध्यक्ष पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए आईजी जोन से शिकायत की। उन्होने मामले की जांच सीओ चांदपुर को सौंप दी है।

एक महिला सिपाही ने आईजी जोन बरेली मुकुल गोयल से शिकायत की कि थाने में प्रभारी पद पर रहे दरोगा ने शादी करने का झांसा देकर उसका एक साल तक यौन शोषण किया। बाद में शादी करने से इंकर कर दिया। महिला कास्टेबिल ने कई बार एसओ पर शादी करने क लिए दवाब बनाया, पर वह तैयार नहीं हुआ। इज्जत के डर से महिला कांस्टेबिल अपना मुंह खोलने से भी डर रही है। आईजी जोन मुकुल गोयल ने सीओ चांदपुर सीपी सिंह को इस मामले की जांच सौंपकर जांच रिपोर्ट देने को कहा। सीओ चांदपुर ने महिला कांस्टेबिल व उसकी साथी अन्य महिला कांस्टेबिल के भी इस संबंध में बयान दर्ज किए है। 

अभी हाल ही में कुशीनगर जिले में भी एक ऐसा मामला देखनें को मिला था| यहाँ एक बलात्कार पीड़ित जब आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाने थाने पहुंची तो वहां मौजूद दरोगा ने उसके साथ सहानभूति दिखाने के स्थान पर अश्लील सवाल पूछने शुरू कर दिए| ये सुनकर बेचारी भौचक्की रह गयी| वो तो यहाँ आई थी इन्साफ मांगने लेकिन कानून के रखवालों ने उसे ऐसा रूप दिखाया कि उसका तो विश्वाश ही उठ गया इस कानून से| दरोगा की इस हरकत से शर्मसार महिला वापस लौट गयी| खबर लिखे जाने तक ये नहीं पता चल सका कि उसने इस दरोगा की शिकायत बड़े अधिकारी से की है या नहीं| हमारे देश का सामाजिक ढांचा कुछ ऐसा है कि बदनामी और अन्य कारणों से बलात्कार के अधिकतर मामले दर्ज ही नहीं होते। यदि कोई पीड़ित पुलिस वालों से शिकायत करने जाता है तो उसे ऐसी बेईज्ज़ती से दो चार होना पड़ता है| सिर्फ इतना ही नहीं रसूखदार आरोपी के सामने हमारी पुलिस भी नतमस्तक नज़र आती है और समझौता करने का दबाव बना देती है|

सितम्बर 2013 में प्रदेश के देवरिया में नौकरी दिलाने के नाम पर एक महिला खिलाड़ी के साथ महीनों तक सिपाही द्वारा दुराचार किये जाने का मामला सामने आया। इस मामले में आरोपी सिपाही के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गयी थी। एसपी देवरिया उमेश श्रीवास्तव ने बताया किसदर कोतवाली इलाके की एक युवती ने देवरिया में तैनात सिपाही राम नारायण यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी| युवती का कहना है कि नौकरी दिलाने के नाम पर महीनों तक उसके साथ दुष्कर्म किया गया। सिपाही उस वक्त सदर कोतवाली में तैनात था। पीड़ित युवती ने कहा कि वह रोज पुलिस लाइन में दौड़ का अभ्यास करती थी। उसी वक्त सिपाही ने उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया।सिपाही ने झारखंड के देवघर में वैद्यनाथ धाम मंदिर में उसके साथ शादी भी की। वहां से लौटने के बाद उसने अपना तबादला प्रतापगढ़ करा लिया| सिपाही राम नारायण यादव के खिलाफ आईपीसी की धारा 419,420,467,468 तथा 376 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गयी है।

इसके अलावा दिसंबर 2012 में एक ऐसा ही मामला फैजाबाद जिले में देखने को मिला था| जहां एक पुलिस वाले ने डीआइजी के यहां बयान दिलाने के बहाने एक युवती को अपनी हवस का शिकार बनाया|सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी दारोगा को गिरफ्तार कर लिया। युवती की तहरीर पर महिला थाने में एसएसआइ के विरुद्ध दुराचार का मुकदमा पंजीकृत कर दारोगा को जेल भेज दिया गया। 

पुलिस ने बताया कि अम्बेडकर जिले के कोतवाली अकबरपुर क्षेत्र की पहितीपुर निवासी 16 वर्षीय युवती ने चार महीने पहले अकबरपुर कोतवाली में रेप का मुकदमा दर्ज कराया था| इस मामले की जांच सीनियर सब-इंस्पेक्टर मान सिंह को सौंपी गई थी। बुधवार को आरोपी दारोगा युवती को डीआईजी के यहां बयान दिलाने के बहाने फैजाबाद लेकर आया और शहर के एक होटल में युवती को अपना करीबी रिश्तेदार बताकर कमरा लिया| दिनभर युवती उसी होटल में रही और देर शाम डीआईजी के न मिलने की बात कहकर मान सिंह ने युवती को कमरे में रुकने को कहा। युवती ने बताया कि कुछ देर बाद मान सिंह लौटकर आया और मेरे सात गलत हरकत करने लगा| इसके बाद जब मान सिंह सो गया तो युवती ने इसकी जानकारी मोबाइल के जरिये अपने परिचितों को दी| इस दौरान परिचितों ने पुलिस से संपर्क साधा| पुलिस ने युवती को होटल से बरामद किया और आरोपी दारोगा को पकड़ लिया। युवती का कहना है उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया है और वह अपने दादी के साथ रहती है।

नवम्बर 2012 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक दरोगा की काली करतूत ने खाकी को शर्मसार कर दिया था| माल में तैनात दरोगा ने जांच के बहाने दलित महिला को थाने बुलाया और एसओ आवास में बंधक बनाकर दुष्कर्म करने का प्रयास किया| दलित महिला की पुकार सुनकर एसओ व अन्य पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और दरवाजा तोड़कर महिला की आबरू लुटने से बचाया| क़स्बा माल की विजयलक्ष्मी ने नौ महीने पहले एक दलित महिला पर मारपीट का आरोप लगाते हुए थाने में तहरीर दी थी| बाद में इलाके के कुछ लोगों ने दोनों के बीच समझौता कराकर मामले को रफा-दफा कर दिया लेकिन विजयलक्ष्मी की तहरीर थाने में ही रह गई| कुछ दिन पहले विजयलक्ष्मी की यह तहरीर दरोगा कामत प्रसाद अवस्थी के साथ लगी| दरोगा ने दलित महिला के बारे में छानबीन की और जांच के बहाने उसे फोन करना शुरू कर दिया| 

खाकी को शर्मसार करने वाले इस दरोगा ने मामला समाप्त कराने के बहाने महिला को फोन किया और उससे अश्लील बातें करने लगा| दरोगा ने बुधवार रात दलित महिला को फोन किया और कहा कि कप्तान के यहां से जांच आई है, जल्दी थाने में मेरे कमरे पर आ जाओ, बयान दर्ज करके तुरंत रिपोर्ट देनी है| ऐसा करने से यह मामला समाप्त हो जायेगा| इसके बाद महिला अपने पति के साथ रात में थाने के गेट पर पहुंची लेकिन दरोगा ने उसे दोबारा फोन कर अकेले कमरे में आने के लिए कहा| 

थाने में कई अन्य पुलिस को देखकर महिला एसओ के आवास में गई| वहां पहले से उपस्थित दरोगा ने उसे कमरे में बुलाया और दरवाजा भीतर से बंद कर छेड़खानी करने लगा| खींचतान में दरोगा की बनियान फट गई| महिला की चींख पुकार सुनकर एसओ राकेश कुमार सिंह व अन्य पुलिसकर्मी कमरे की तरफ दौड़े| एसओ ने किसी तरह कमरा खुलवाकर महिला को दरोगा के चंगुल से छुड़ाया| इस बीच मौका पाकर दरोगा कामता प्रसाद ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और दूसरे रास्ते से फरार हो गया| दरोगा कामता प्रसाद द्वारा दलित महिला के साथ थाने में दुष्कर्म का प्रयास करने की खबर फैलाते ही ग्रामीण थाने के बाहर एकत्रित हो गए और दरोगा के खिलाफ कार्यवाहीं की मांग कर प्रदर्शन करने लगे| एसओ ने दरोगा के खिलाफ सख्त कार्यवाही का आश्वासन देते हुए उग्र ग्रामीणों को शांत कराया| यदि प्रदेश में हो रही इस तरह की ताबड़तोड़ घटनाओं को सूबे की सरकार गम्भीरता से नहीं लेती हैं तो मित्रता का ढोल पीटने वाले यूपी की पुलिस पर से जनता का विश्वास उठ जाएगा?

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