28 दिसंबर, 2013

....यहां से कोई भी शनि भक्त नहीं लौटता निराश!

शनि एक ऐसा नाम है जिसे पढ़ते-सुनते ही लोगों के मन में भय उत्पन्न हो जाता है। ऐसा कहा जाता है कि शनि की कुद्रष्टि जिस पर पड़ जाए वह रातो-रात राजा से भिखारी हो जाता है और वहीं शनि की कृपा से भिखारी भी राजा के समान सुख प्राप्त करता है। यदि किसी व्यक्ति ने कोई बुरा कर्म किया है तो वह शनि के प्रकोप से नहीं बच सकता है। लेकिन अभी स्थान बताने जा रहा हूँ वहाँ पहुंचकर यदि कच्चा धागा बाँधा जाए तो शनि के प्रकोप से तो बच ही सकते हैं साथ साथ शनि महाराज का वरदान भी प्राप्त कर सकते हैं|

आपको बता दें कि हिमाचल प्रदेश के महाकाल मंदिर में शनिदेव का ऐसा मंदिर है, जहां खंभों पर कच्चा धागा बांध दिया जाए तो न केलव शनि प्रकोप कट जाता है बल्कि विपरीत ग्रह स्थिति से भी मुक्ति मिल जाती है| हिमाचल प्रदेश के महाकाल गांव में बने शनिदेव के मंदिर में हर राशि का एक खंभा है| मान्यता है कि कोई भी भक्त सच्चे दिल से यदि इन खम्भों पर कच्चा धागा बांधकर कामना मांगता है तो उसे शनिदेव कभी भी निराश नहीं लौटाते हैं| 

कहते हैं इसी मंदिर में आकर शनि ने महाकाल की आराधना कर उनसे शक्तिशाली होने का वरदान पाया था| यहीं पर शनिदेव की इच्छा पूरी हुई थी, इसलिए यहां शनिदेव भक्तों की हर इच्छा पूरी करते हैं| भक्तों को यकीन है कि मंदिर में पूजा करने और शनिदेव पर सरसों का तेल चढ़ाने से सात हफ्तों में साढ़ेसाती से छुटकारा मिल जाता है| यही नहीं ग्रहों की टेढ़ी चाल से भी मुक्ति मिलती है| लेकिन जिस ग्रह की टेढ़ी चाल से छुटकारा पाना हो उस राशि के दिन आकर कच्चा धागा बांधना होता है, फिर शनि के साथ ग्रहों की बिगड़ी चाल का भी निवारण हो जाता है|

शनिदेव सूर्य और छाया के पुत्र हैं, लेकिन रंग-रूप बिल्कुल अलग| सूर्य एकदम चमकते-दमकते वहीँ शनि एकदम काले उसपर उनका क्रोधी स्वभाव| सूर्यदेव को संदेह हो गया कि क्या वाकई शनि उनके पुत्र हैं, उनके इस शक को देवताओं ने और बढ़ाने का काम किया| पति के इस आरोप से छाया व्यथित हो उठीं| सूर्यदेव ने पुत्र सहित छाया का त्याग कर दिया| कहते हैं बड़े होने पर जब शनि ने मां से अपने पिता के बारे में पूछा तो छाया ने पूरी कहानी बताई|

शनि के लिए ये एक ऐसी मुश्किल की घड़ी थी, जिसका समाधान करना उनके जीवन का सबसे बड़ा मकसद बन गया| कहते हैं जब शनिदेव ने हिमाचल प्रदेश के इसी महाकाल मंदिर में आकर शिव की आराधना की और घनघोर तप किया| शनि की पूजा और आंसुओं ने महाकाल को पिघला दिया| महाकाल के आशीर्वाद ने शनिदेव को इतना शक्तिशाली बना दिया कि इंसान क्या देवता भी उनसे खौंफ खाते हैं| इतना ही नहीं महाकाल ने सूर्य देव को भी ये विश्वास दिला दिया कि शनि उन्हीं के पुत्र हैं| उसी दिन से इस धाम में शिव और शनिदेव की एक साथ पूजा की जाती है|

वहीँ, यदि मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिदेव मंदिर की बात करें तो यहाँ पर तेल नहीं बल्कि दूध चढ़ाया जाता है| यह सुनकर आपको अचम्भा जरुर लगा होगा लेकिन यह सौ फीसदी सच है| इंदौर के जूना में एक शनिदेव का ऐसा मंदिर है जहाँ शनि को तेल नहीं बल्कि उनका दुग्धाभिषेक किया जाता है| इतना ही नहीं यहां शनि देव को सुंदर वस्त्रों एवं मालाओं से भी सजाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। 

स्थानीय लोगों का मानना है कि यह मंदिर 700 वर्ष पुराना है। इस मंदिर में शनि देव की प्रतिमा के विषय में कथा है कि, शनि देव ने एक अंधे व्यक्ति को सपने में आकर अपनी प्रतिमा के विषय में बताया। जब वह व्यक्ति शनि देव द्वारा बताये गये स्थान पर पहुंचा तब उसकी आंखों की रोशनी लौट आयी और गांव वालों की मदद से प्रतिमा को मंदिर में लाया गया। 

वही स्थानीय लोग शनिदेव का दूसरा चमत्कार यह बताते हैं कि प्रतिमा मंदिर में स्थापित करने के कुछ दिनों बाद शनि जयंती के दिन यह प्रतिमा अपने स्थान से हटकर दूसरे स्थान पर पहुंच गयी। वर्तमान में यह प्रतिमा उसी स्थान पर है। जहां पहले शनि की प्रतिमा स्थापित की गयी थी उस स्थान पर अब राम जी की प्रतिमा स्थापित है। 

यहाँ के एक व्यक्ति ने बताया है कि इस मंदिर में प्रत्येक शनिवार, अमवस्या, ग्रहण और शनि जयंती के दिन बड़ी संख्या में लोग शनि देव के दर्शनों के लिए आते हैं। शनि जयंती के अवसर पर यहां एक हफ्ते का मेला लगता है और लोग शनि देव की पूजा अर्चना करके शनि दोष से मुक्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

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