02 जनवरी, 2014

सर्द हवाओं के बीच नाकाफी अस्पतालों के रैन बसेरे

लखनऊ| राजधानी के अस्पतालों में कड़ाके की ठंड से तीमारदारों को बचाने के लिए किए गए इंतजाम अब ऊंट के मुंह में जीरा नजर आने लगे हैं। तीमारदारों को ठंड से बचाने के लिए अस्पतालों में कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं, और जिन अस्पतालों में ठंड से निपटने के लिए व्यवस्था की गई है, वह भी नाकाफी साबित हो रही है।

सरकारी अस्पताल इन दिनों मरीजों के तीमारदारों को सुविधाएं देने के बजाय उनकी तकलीफों को और बढ़ा रहे हैं। एक तरफ जहां रैन बसेरों में रहने वाले तीमारदारों को रात की सर्द हवाओं से ठिठुरना पड़ रहा है, तो वहीं इन रैन बसेरों में गंदगी, मच्छरों और चोरों का भी आतंक रहता है। ऐसे में तीमारदारों को दोहरी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

प्रदेश के दूर-दराज के इलाकों से राजधानी के चिकित्सा विज्ञान महाविद्यालय एवं अस्पताल सहित विभिन्न अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों के तीमारदारों को अस्पताल प्रशासन की उपेक्षा का शिकार होना पड़ रहा है। यहां पर आए मरीजों के तीमारदारों को अस्पताल प्रशासन ने सुविधा के नाम पर सिर्फ रहने के लिए रैन बसेरे बनवाए हैं, लेकिन आलम यह है कि वह भी नाकाफी सिद्ध हो रहे हैं।

कुछ इसी तरह का हाल महिला अस्पतालों का है। क्वीन मैरी अस्पताल में तीमारदार अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार से लेकर कहीं भी मुफीद जगह देखकर अपना अस्थाई ठिकाना बना लेते हैं। रैन बसेरों में गंदगी और अव्यवस्था भी चरम पर है। यहां आए मरीजों के तीमारदारों को पीने के पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।

इन रैन बसेरों में मच्छरों से निजात दिलाने के लिए कोई व्यवस्था न किए जाने के कारण तीमारदारों के खुद बीमार पड़ने का भय बना रहता है। सुरक्षा के नाम पर अस्पताल प्रशासन ने सुरक्षाकर्मी नियुक्त किए हैं, इसके बावजूद तीमारदारों का समान चोरी होना आम बात हो गई है।

हरदोई निवासी कुंती गुप्ता का इलाज कराने आए सुशील कुमार गुप्ता बताते हैं कि वह सात दिनों से रैन बसेरे में रह रहे हैं। इन रैन बसेरों में गंदगी चरम पर है। वह बताते हैं कि सफाईकर्मी इन रैन बसेरों के सामने झाड़ू लगा कर निकल लेते हैं, जबकि रैनबसेरों में जहां तहां गंदगी का अंबार लगा रहता है। गंदगी से इन रैन बसेरों में संक्रमण का खतरा मंडराता रहता है।

चिकित्सा विज्ञान संस्थान एवं अस्पताल में इलाज करवाने आए देवरिया निवासी सर्वदेव तिवारी ने बताया कि वह अपनी बहु का इलाज करवाने के लिए यहां कई दिनों से रह रहे हैं। यहां की अव्यवस्था के बारे में पूछने पर वह अस्पताल प्रशासन पर बिफर पड़े। उन्होंने कहा कि तीमारदारों के लिए यहां सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं है, रहने के लिए रैन बसेरा तो बना है, लेकिन गंदगी इतनी रहती है कि सांस लेना मुश्किल होता है।

बलरामपुर अस्पताल में अपने बच्चे का इलाज कराने देवरिया से आए मोहम्मद याकूब भी इन रैन बसेरों में व्याप्त गंदगी से परेशान दिखे। याकूब ने बताया कि यहां के शौचालयों की स्थिति बहुत खराब है। उन्होंने आगे बताया कि रैन बसेरों में दरवाजे तो हैं पर इनकी कुंडियां टूटी हुई हैं, तथा स्नानघर अत्यंत गंदे रहते हैं।

कैंसर की गांठ का इलाज करवाने आए योगेंद्र के परिजन सतपाल ने बताया कि वह रैन बसेरे में व्याप्त गंदगी के चलते अस्पताल के एक कोने को ही अपना ठिकाना बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि गंदगी के अलावा यहां पीने के साफ पानी का अभाव है और मच्छरों का आतंक काफी व्याप्त है। इन सरकारी अस्पतालों में तीमारदारों के लिए अलाव की भी कोई मुकम्मल व्यवस्था नहीं की गई।

तीमारदारों की समस्याएं-

1- रैनबसेरों में साफ-सफाई का न होना।

2- मच्छरों का प्रकोप।

3- सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता न होने से चोरों का आतंक।

4- सर्दी से बचने के अभी भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं।

5- शौचालयों व स्नानघरों में गंदगी।

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