13 जनवरी, 2014

मूवी रिव्यूः डेढ़ इश्किया

निर्देशक: अभिषेक चौबे
कलाकार : माधुरी दीक्षित, हुमा कुरैशी, अरशद वारसी, नसीरूद्दीन शाह, विजय राज

मुंबई। बॉलीवुड मोहिनी माधुरी दीक्षित की बहुप्रतीक्षित फ़िल्म "डेढ़ इश्किया" कल रिलीज हो चुकी है। यश राज कैंप की 'आजा नच ले' के लंबे अर्से बाद इस बार जब माधुरी बड़े पर्दे पर नजर आ रहीं हैं। निर्देशक अभिषेक चौबे ने बॉलीवुड में बतौर निर्देशक अपनी शुरूआत ब्लैक कॉमेडी थ्रिलर फिल्म "इश्किया" से की थी। इस हफ्ते रिलीज हुई उनकी दूसरी फिल्म "इश्किया" की सीक्वल "डेढ़ इश्किया" है। फ़िलहाल पिछली कहानी से इसका कोई लेना-देना नहीं है। यह फिल्म रोमांस, एक्शन और कॉमेडी का कॉकटेल है, जिसका हर दृश्य दिलचस्प है।

नवाबी छाप छोड़ती कहानी बेहद असरदार है। कहानी में खालूजान (नसीरूद्दीन शाह) नवाब का नेकलेस चुराने के बाद से फरार है, जबकि बब्बन (अरशद वारसी) को मुश्ताक भाई (सलमान शाहिद) ने नेकलेस के लिए पकड़ रखा है। इस बार खालूजान महमूदाबाद के एक पुराने भव्य महल में पहुंचते हैं, इस महल में खूबसूरत बेगम पारा (माधुरी दीक्षित) ने एक खुला मुशायरा आयोजित किया हैं। बेगम पारा के इस महल में खालूजान भी खुद को नवाब बताकर दाखिल हो जाते हैं। इस बार उनका मकसद कोई छोटा-मोटा हाथ मारने की बजाय महल की तिजोरी में रखी दौलत को लूटना है। खालूजान खुद को शायर बताते हैं और मुशायरे में शामिल हो जाते हैं। शायरे में अपनी शायरी से बेगम पारा को प्रभावित करने वाले खालूजान साहब खुद बेगम पारा से प्यार करने लगते हैं।

बेगम पारा का शौहर अब इस दुनिया में नहीं हैं, इस लिए बेगम को अब अपने लिए जीवनसाथी चाहिए। बेगम पारा इसकी वजह भी अपने मरहूम पति की आखिरी ख्वाहिश बताती है। पारा कहती हैं कि नवाब साहब ने मरने से पहले उनसे ऐसा वचन लिया था। इसी मुशायरे के दौरान खालूजान देखते हैं कि यहां बब्बन मियां भी पहुंच चुके हैं। महल में आने के बाद बब्बन मियां को बेगम साहिबा खासमखास नौकरानी मुनिया (हुमा कुरैशी) से इश्क हो जाता है। इसके बाद कई ऎसी परिस्थितियां बनती हैं, जिनको देखना एक इंटरेस्टिंग एक्सपीरियंस है।

अभिषेक चौबे की स्क्रीनप्ले के साथ डायरेक्शन पर भी पकड़ रही। इस फिल्म को यकीनन अपनी पिछली फिल्म इश्किया के मुकाबले कहीं ज्यादा दमदार बनाया है। अभिषेक अपनी स्क्रिप्ट से नहीं भटकते । इस फ़िल्म में उन्होंने माधुरी को 20-25 साल की लड़की दिखाने की कोशिश नहीं की, जिस उम्र में वह हैं, उसी के अनुसार उन्हें पेश किया है। फ्लैशबैक में माधुरी और नसीर के युवावस्था के किरदारों के लिए उन्होंने युवा कलाकारों का सहारा लिया है। फिल्म के हर सीन पर उनकी छाप नजर आती है।

पूरी फिल्म नसीरुद्दीन शाह और माधुरी दीक्षित पर टिकी है। पूरी फिल्म में इन दोनों ने गजब अभिनय किया है। माधुरी के फैंस के लिए ये फ़िल्म बहुत अच्छी है। नसीर ने भी अपने किरदार को बखूवी निभाया है। अरशद वारसी और नसीर की केमिस्ट्री खूब जमती है। खालूजान और बब्बन मियां के ज्यादातर सीन फिल्म की हैं। विशाल भारद्वाज संगीत भी ठीक-ठाक है।

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