03 सितंबर, 2015

PHOTO: ऐसे ही नहीं भारत को कहा गया सोने की चिड़िया, यहां नदियां उगल रहीं सोना

भारत को ऐसे ही नहीं सोने की चिड़िया कहा जाता है| यहां नदियों में सोना बहता है| यकीन न हो तो झारखंड जाके खुद ही देख लो| राजधानी रांची से करीब 15 किलोमीटर दूर रत्नगर्भा में बहने वाली स्वर्ण रेखा नदी कोई आम नदी नही है। क्योंकि इस नदी में सोने का इतना बड़ा भंडार समाया हुआ है जिसका आप अंदाजा भी नही लगा सकते।

इस नदी के पानी में सोने के कण पाए जाते हैं। यहां रहने वाले आदिवासी दिन-रात इन कणों को इकठ्ठा करते हैं। बड़े-बड़े व्यापारी यहां आते हैं और आदिवासियों से बहुत ही कम कीमतों पर सोना खरीद लेते हैं। यह नदी अन्य किसी भी नदी में नही मिलती है। बल्कि यह नदी सीधे बंगााल की खाड़ी में गिरती है। 

स्थानीय लोगों का कहना है कि आज तक कितनी ही सरकारी मशीनों द्वारा इस नदी पर शोध किया गया है, लेकिन वे इस बात का पता नही लगा पाये कि आखिरकार यह कण जमीन के किस भाग में विकसित होते हैं।

यहाँ की रहने वाली तारिणी नाम की एक महिला ने बताया कि कई बार घंटों नदी की धार मे खड़े होने के बावजूद सोने के कण नहीं मिलते, इसके लिए काफ़ी सब्र रखना होता है, कई बार जल्दी ही ज्यादा कण मिल जाते हैं। जाने-माने भूवैज्ञानिक नीतीश प्रियदर्शी ने बताया कि स्वर्णरेखा और करकरी जैसी नदियां अपने उदगम स्थल से नीचे आते-आते कई तरह की चट्टानों से टकराती हैं।

इसी दौरान इनमें सोने के अति सूक्ष्म कण मिल जाते हैं| इन्हीं कणों को गांव के लोग चुनते हैं। उन्होंने बताया कि न केवल स्वर्णरेखा और करकरी बल्कि कोयल व दामोदर जैसी नदियों से भी कुछ खास इलाकों में सोने के कण निकाले जाते हैं।








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