09 अक्तूबर, 2013

कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में अखिलेश सरकार नाकाम, पुलिस हिरासत में हो रही मौतें

पिछले कुछ महीनो पर नज़र डालें तो साफ़ जाहिर होता है कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था के नाम पर जमकर खिलवाड़ हो रहा है| प्रदेश में अपराध का ग्राफ बढ़ता ही जा रहा है| यहाँ हिरासत में मौत आम बात हो गयी हैं| अभी हाल में प्रदेश के बरेली जिले में जहाँ एक नहीं बल्कि दो थानों में अभियुक्तों की पुलिस हिरासत में मौत हो गई और पुलिस उसे आत्महत्या करार देने में जुटी रही अभी यह मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि एक और ऐसी घटना अलीगढ़ में देखने को मिल गई|

अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र के सारसौल निवासी ज्ञानेंद्र सिंह उर्फ पप्पू (37) को शराब तस्करी के आरोप में सिपाही गिरीश कुमार, राजेश और अशोक कुमार मंगलवार शाम को पकड़कर थाने ले आए। पप्पू के परिजनों का कहना है पुलिसकर्मी पप्पू को छोड़ने के बदले रुपये मांग रहे थे और रुपये न देने पर हिरासत में उसकी बेरहमी से पिटाई की गई, जिससे उसकी मौत हो गई। वहीं पुलिस का कहना है कि पप्पू ने रात को हवालात के शौचालय में पजामे के नाड़े को खिड़की से बांधकर फांसी लगा ली।

अलीगढ़ के पुलिस अधीक्षक (शहर) पंकज पांडे ने बुधवार को संवाददाताओं को बताया कि घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दे दिए गए हैं। शव के पोस्टमार्टम के बाद ही मौत की असल वजह का पता चल सकेगा। पांडे ने कहा कि जिन सिपाहियों पर वसूली और पिटाई के आरोप हैं, उन्हें निलंबित कर उनके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।

उत्तर प्रदेश में यह कोई पहला मामला नहीं है जब पुलिस हिरासत में कैदियों की मौत हो रही है इससे पहले भी कई मामले इस तरह के आ चुके हैं लेकिन अखिलेश सरकार कार्यवाई करने के बजाय हाथ पर हाथ रखे हुए बैठी है| इससे पहले के बरेली में थाना हाफिजगंज की हवालात में युवक की हुई मौत के बाद एसएसपी ने कड़ा रुख अपनाते हुए एसओ समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया था|

गौरतलब है कि लूट के कथित मामले में पकड़कर लाये गये दलित युवक सोहनलाल बीती रात को हाफिजगंज थाने की हवालात में फंदे पर लटका मिला| हाफिजगंज पुलिस फरीदपुर के दन्नपुरा निवासी सोहन लाल दलित को 6 अगस्त को सुन्नौर के ब्रजपाल यादव और सुकटिया के ओमकार के घर लूटपाट के मामले में पकड़ा था| रविवार को दलित सोहनलाल के परिजन ग्राम प्रधान आदि लोग थाने पर मिलने पहुचे तो सोहनलाल घबराया डरा हुआ था और बार-बार कह रहा था की मैंने कुछ नहीं किया है| मुझे छुड़ा लो पुलिस वाले मुझे मार डालेगे वह रो रोकर अपबीती अपने परिजनों को सुना रहा था और सोहनलाल की बेगुनाही के चलते परिजन व ग्राम प्रधान ने एसओ यादव से सोहनलाल को छोड़ने की विनती की तो एसओ योगेंदर कृष्ण यादव ने कहा कि लूट करने वाले आरोपियों के नाम सोहनलाल बता देगा तो छोड़ देगे|

यह कहकर परिजनों को थाने से वापस कर दिया बीती रात को हवालात से निकालकर पुलिस ने जमकर सोहन को पीटा और दूसरे पकड़े गये शक के आधार पर तोताराम, सोहनलाल के भतीजे के सामने ही पिटाई का सिलसिला चल रहा था| पिटाई से पस्त हो चुके सोहन की हालत बिगड़ने पर पुलिस ने उसे हवालात में बंद कर दिया और उस के बाद हवालात से सोहन की लाश बरामद हुई जिसे अब पुलिस आत्महत्या का रूप दे रही है| पुलिस का कहना है कि सोहन ने अपनी टीशर्ट की आस्तीन से फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली है बरेली पुलिस दलितों पर इस कदर अत्याचार कर रही है जिसका अंदाज इन्ही घटनाओ से बखूबी लगाया जा सकता है एक के बाद एक दलित युवको की पुलिस पिटाई से हत्या होती चली जा रही है|

गौरतलब है कि अभी 26 सितम्बर को ही मोनू नाम के दलित युवक की थाना बिथरी की पुलिस चौकी रामगंगा पर जमकर पिटाई की गयी थी जिस के चलते उसकी मौत हो गयी जिसे पुलिस के अधिकारी ने आत्म हत्या का रूप दिया लेकीन पोस्टमार्टम में मौत का रूप ही अलग था| ठीक उसी प्रकार अब दलित सोहनलाल की मौत को पुलिस व अधिकारी आत्महत्या बता रहे है| जबकि प्रत्यक्षदर्शी सोहन लाल का भतीजा तोताराम आँखों देखी घटना को बताते हुए पुलिस की पिटाई से सोहन की हत्या बता रहा है और मृतक की पत्नी ने भी पुलिस की पिटाई से युवक की मौत का होना बताया|

उससे पहले मई माह में राजधानी लखनऊ के ट्रामा सेंटर में एक विचाराधीन कैदी की मौत से एटा जिले की पुलिस सवालों में घिर गई है। आरोप है कि हत्या के आरोपी इस युवक से पुलिस ने कथित रूप से थर्ड डिग्री के बल पर जुर्म कबूल करवाया था और फिर जेल भेज दिया था। यातना से पीड़ित युवक की जेल में हालत बिगड़ गई और उसे इलाज के लिए लखनऊ ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया था जहां शुक्रवार को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। अलीगढ़ रेंज के डीआईजी प्रकाश डी. ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। आरोप है कि पुलिस ने युवक के गुप्तांग में पेट्रोल और तेजाब भरकर इंजेक्शन लगाया, जिससे उसकी पहले हालत खराब हुई और फिर बाद में मौत हो गई।

एटा जिले के सकरौली क्षेत्र के इसौली गांव के रहने वाले मानिकचंद्र सरानी का शव 9 अप्रैल को हजारा नहर में मिला था। मृतक के चाचा गंगाराम ने मामले में मानिकचंद्र के ससुर साहब सिंह, पत्नी सावित्री देवी, ससुर के भाई सुनहरी लाल, प्रेमपाल और सरानी गांव के प्रधान मनवीर सिंह सहित पांच लोगों के खिलाफ अवागढ़ थाने में आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे की तफ्तीश के दौरान चार दिन बाद ही अवागढ़ पुलिस ने केस का रुख पलट दिया और मानिकचंद्र के भाई महेश और बहनोई चोब सिंह और गांव के ही बलवीर और बनी खान पर अवैध संबंधों के चलते हत्या कर शव नहर में फेक देने का आरोप लगाया। 20 अप्रैल को पुलिस ने इस मामले में महेश, चोब सिंह, बलवीर और बनी खान को हिरासत में लिया।

जुर्म का इकबाल कराने के बाद पुलिस ने सभी को 24 अप्रैल को जेल भेज दिया। जेल में बलवीर की तबीयत बिगड़ गई। जेल प्रशासन ने बलवीर को पहले इलाज के लिए एटा जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से डाक्टरों ने उसे केजीएमयू रेफर कर दिया। शुक्रवार सुबह बलवीर ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। डीआईजी अलीगढ़ प्रकाश डी. ने कहा कि उन्होंने मामले की जांच का आदेश एटा पुलिस को दे दिया है। जांच में जो भी पुलिसकर्मी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले अप्रैल माह में राजधानी लखनऊ में भी एक इसी तरह का मामला प्रकाश में आया था| लखनऊ में डालीगंज क्षेत्र में अवैध शस्त्र रखने के आरोप में गिरफ्तार एक युवक की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई थी| मदेयगंज चौकी प्रभारी शिवाकांत त्रिपाठी वीरेन्द्र मिश्रा (26) को अवैध असलहा रखने के मामले में पकड़ पर हसनगंज कोतवाली लाए थे। जहां पर रात में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। एएसपी ट्रांसगोमती हबीबुल हसन ने दावा किया था कि वीरेंद्र ने हवालात में मिले कंबल को फाड़कर उसके सहारे दस फीट ऊंचे रोशनदान से लटककर फांसी लगाने का प्रयास किया। वीरेंद्र को फांसी पर लटका देखकर उसे ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।

घटना की सूचना पाकर एएसपी, सीओ महानगर राजेश श्रीवास्तव, सीओ महानगर विद्यासागर मिश्र, सीओ गाजीपुर विशाल पांडेय सहित अन्य पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और छानबीन शुरू की। वहीं पुलिस देर रात तक घटना को दबाने का प्रयास करती रही और वीरेंद्र के घरवालों को भी इसकी सूचना नहीं दी गई थी। आशंका है कि पुलिस पिटाई से वीरेंद्र की जान गई है। मायानगर, हसनगंज निवासी वीरेंद्र की बूढ़ी मां लाभेश्वरी मिश्र के मुताबिक, पुलिस ने उनके बेटे वीरेंद्र को घर से पकड़ा था। वीरेंद्र होली के बाद ही वाहन चोरी के मामले में जेल से छूटकर आया था। वीरेंद्र के पिता स्व.महेंद्र मिश्र डालीगंज स्थित एक दुकान में मुनीम थे। बताते हैं कि उसके बड़े भाई योगेंद्र की करीब एक साल पूर्व बीमारी से मौत हो गई थी। उसका एक भाई जितेंद्र निजी नौकरी करता है।

वीरेंद्र के परिजन यह भी बताते हैं कि जितेंद्र खाना लेकर कोतवाली गया था लेकिन पुलिस ने न वीरेंद्र को खाना दिया और न ही जितेंद्र को उससे मिलने दिया गया था। घटना का पता लगने पर मुहल्ले के लोगों में काफी आक्रोश था। कुछ लोगों का कहना था कि पुलिस ने अपने सराहनीय कार्य के चक्कर में वीरेंद्र को उठाकर उसके पास से तमंचा दिखा दिया। पुलिस किसी घटना के राजफाश के लिए उस पर दबाव बना रही होगी और इन्कार पर उसे बेरहमी से पीटा गया होगा। हालांकि अधिकारी वीरेंद्र की पिटाई किए जाने की बात से इन्कार कर रहे हैं।

इस मामले में इंस्पेक्टर जावेद खान, मदेयगंज चौकी प्रभारी शिवाकांत त्रिपाठी, नाइट अफसर दारोगा बृजेश कुमार, हेड कांस्टेबिल राकेश कुमार, सिपाही रामकृपाल पांडेय व संतरी ड्यूटी पर तैनात सिपाही मुनेश्वर को कल रात ही निलंबित कर दिया गया था। आज इनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। इसके साथ ही मामले की जांच सीबीसीआइडी को सौंपी गई है। एसएसपी ने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और जो भी मामले का दोषी पाया जाएगा उसे बक्शा नहीं जाएगा|

इससे पहले इसी महीने प्रतापगढ़ में भी कुछ इसी तरह का मामला प्रकाश में आया था| उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले में कथित रूप से पुलिस प्रताड़ता से हिरासत में हुई महिला की मौत के मामले में जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दे दिए हैं। रानीगंज इलाके में मायके में रही हेमा नाम की महिला की पड़ोसियों से मारपीट हो गई। इसी मामले में उसे पुलिस उसे पूछताछ के लिए थाने ले आई।

परिजनों का आरोप है कि दूसरे पक्ष के लोगों के कहने पर हेमा की हिरासत में इस कदर पिटाई की गई कि वह मरणासन्न हालत में पहुंच गई। बाद में पुलिसकर्मी उसे अस्पताल लेकर गए जहां उसकी मौत हो गई। जिले के अपर पुलिस अधीक्षक वी़ एस़ यादव ने संवाददाताओं को बताया कि जिलाधिकारी की तरफ से घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

इसके अलावा अप्रैल माह में गाजीपुर जिले में एक युवक की पुलिस हिरासत में पिटाई से मौत होने पर नाराज भीड़ ने जमकर हंगामा किया। भीड़ ने पुलिस चौकी और गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। हंसराजपुर पुलिस चौकी के पास स्थित नसीरपुर गांव की 13 साल की एक लड़की 20 साल के एक लड़के के साथ भाग गई थी। युवती के परिवार वालों ने गांव के ही युवक गुल्लू राम के खिलाफ तहरीर दी थी। इस आधार पर आरोपी के दोस्त घनश्याम राम को पुलिस ने हिरासत में लेकर पूछताछ की। आरोप है कि पूछताछ के दौरान उसकी पिटाई की गई और हालत बिगड़ने पर छोड़ दिया।

पिटाई से जख्मी घनश्याम को घर वाले जिला हॉस्पिटल ले जा रहे थे। तभी रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। इससे गुस्से में ग्रामीणों ने शव के साथ सड़क जाम कर दिया और हंसराजपुर पुलिस चौकी में तोड़फोड़ करने के बाद आग लगा दी। भीड़ ने चौकी में खड़ी पुलिस की गाड़ियों को भी आग के हवाले कर दिया। पुलिस के बल प्रयोग के बाद हालात पर काबू पाने में कामयाबी मिली।

उधर राज्य के अपर पुलिस महानिदेशक (एडीसी) अरुण कुमार ने लखनऊ में कहा कि फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में हैं। मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी के जवानों की तैनाती की गई है। उन्होंने कहा कि वाराणसी क्षेत्र के पुलिस उपमहानिरीक्षक को मौके पर भेजकर घटना की जांच करने के लिए कहा गया है। युवक की मौत कैसे हुई यह जांच के बाद ही पता चल सकेगा। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि पिछले कुछ महीनों से पुलिस हिरासत में हो रही कैदियों की मौत से यह साफ़ जाहिर होता है कि अखिलेश सरकार प्रदेश में बिगड़ती कानून व्यवस्था को दुरुस्त करने में नाकाम साबित हो रहे हैं..? 

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