07 दिसंबर, 2013

चिपैंजी को च्यवनप्राश तो गैंडे को गन्ना जूस

बिहार में बढ़ती ठंड का असर अब पटना का दिल कहे जाने वाले संजय गांधी जैविक उद्यान के जानवरों पर भी देखने को मिल रह है। ठंड से बचाने के लिए शेर को भरपूर मांस दिया जा रहा है, चिपैंजी को च्यवनप्राश और छुहारा दिया जा रहा है तो गैंडे को गन्ने का जूस देकर उसे वातावरण के अनुकूल रखा जा रहा है।

पटना सहित राज्य के लगभग सभी इलाकों में शीतलहर का प्रकोप है। इस कारण उद्यान के जानवरों के रहने के लिए भी खास व्यवस्था की गई है। संजय गांधी जैविक उद्यान के एक अधिकारी की मानें तो शेर और बाघों के कटघरों में फूस के टाट लगा दिए गए हैं और ब्लोअर भी चलाया जा रहा है। सांपघर में सांपों को गरमी पहुंचाने के लिए ज्यादा वाट के बल्ब जला दिए गए हैं और कंबल की व्यवस्था की गई है।

चिपैंजी और बिग कैट के कटघरों में ब्लोअर चल रहे हैं, तो बंदर, भालू और हिरण के बाड़ों में भी पुआल का इंतजाम कर दिया गया है। इसके अलाव ठंडी हवा से इन जानवरों को ज्यादा परेशानी न हो, इसके लिए उनके कटघरों को तिरपाल और टाट से घेरा भी गया है और कई जानवरों के लिए हीटर की व्यवस्था की गई है।

जैविक उद्यान के निदेशक एस़ चंद्रशेखर ने बताया कि ठंड के मौसम में हर वर्ष वन्यजीवों के भोजन की सूची में परिवर्तन किया जाता है। सभी पशु-पक्षियों के लिए मौसम के हिसाब से उनके शरीर में प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखने के लिए ऐसी व्यवस्था की जाती है। उन्होंने बताया कि इस चिड़ियाघर में करीब 1,200 वन्यजीव हैं, जिनके खाने पर हर साल करीब नौ लाख रुपये खर्च होते हैं।

चिड़ियाघर घूमने आने वाले लोग भी मानते हैं कि ठंड के मौसम में खिली धूप में घूमने में तो मजा आता है लेकिन ठंड के कारण हिरण की मदमस्त चाल ठहरी होती है, तो चीतल और सांभर भी ठंड से ठिठुर रहे होते हैं और कोहरे भरे दिनों में तो वन्यजीव बाहर ही नहीं निकलते। मोर, तोता और शुतुरमुर्ग जैसे पक्षी धूप की आस में घोंसले से बाहर सुबह जरूर निकलते हैं, परंतु कोहरे के कारण फिर से घोंसलों में दुबक जाते हैं। इस समय हालत यह है कि ठंड की वजह से चिड़ियाघर घूमने आने वाले दर्शक काफी इंतजार के बाद भी वन्यजीवों को नहीं देख पा रहे हैं।

चिड़ियाघर प्रशासन ने पशु-पक्षियों को ठंड से बचाने के लिए मुकम्मल व्यवस्था की है। उद्यान के अधिकारी ने बताया कि शेर, बाघ और तेंदुए के खाने में मांस की मात्रा बढ़ा दी गई है और नाश्ते में चिकन परोसा जा रहा है। चिपैंजी को ठंड से बचाने के लिए च्यवनप्राश, अनार, सेब, काजू और बादाम दिया जा रहा है तथा भालू और बंदर को अंडे खिलाकर उन्हें सर्दी से बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि वन्यजीवों के लिए महुआ की व्यवस्था की गई है और उनके भोजन में गुड़ की मात्रा बढ़ा दी गई है। गैंडे, हिरण और हाथी के लिए गन्ने के जूस की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों ने बताया कि वन्यजीवों की सेहत का ख्याल रखते हुए ठंड में उन्हें कई तरह की दवाइयां, मल्टी विटामिन और मिनरल मिश्रण भी दिए जा रहे हैं। पटना की 152. 95 एकड़ भूमि में फैले इस उद्यान में 1,200 से ज्यादा पशु-पक्षी हैं। देश-विदेश से प्रतिदिन यहां सैकड़ों लोग घूमने आते हैं और पशुओं को देखकर रोमांचित होते हैं। 

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