02 जनवरी, 2014

स्मारक घोटाला: नसीमुद्दीन, कुशवाहा समेत 19 पर कसा शिकंजा

उत्तर प्रदेश की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती के शासनकाल में तमाम घोटालों को अंजाम दिया गया| जैसे कि एनआरएचएम, स्मारक, खाद्यान्न, हाथी, फौव्वारा, यहाँ तक की पेड़- पौधे व घास फूस को भी नहीं छोड़ा गया उसमें भी घोटाला किया गया| तात्कालिक बसपा सरकार में शासनकाल में हुए बहुचर्चित स्मारक घोटाले के घोटालेबाजों पर अब सिकंजा कस्ता नज़र आ रहा है| सतर्कता विभाग (विजिलेंस विभाग) ने बुधवार को पिछली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) सरकार के कद्दावर मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा सहित 19 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। 

राज्य सरकार की हरी झंडी के बाद सतर्कता विभाग के महानिदेशक ए़ एल़ बनर्जी ने मुकदमा दर्ज कराने के आदेश दिए। सिद्दीकी, कुशवाहा और राजकीय निर्माण निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक सीपी सिंह व संयुक्त निदेशक एसए फारुखी सहित कुल 19 लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार सहित विभिन्न धाराओं में लखनऊ के गोमतीनगर थाने में दर्ज कराया गया।

गौरतलब है कि मायावती सरकार के शासनकाल में वर्ष 2007 से 2012 के बीच नोएडा व लखनऊ में करीब साढ़े चार हजार करोड़ रुपये की लागत से स्मारकों और पार्को का निर्माण कराया गया था। इसमें करीब 1,400 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई थी। समाजवादी पार्टी की अखिलेश यादव सरकार ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) शासनकाल में बनाए गए स्मारकों व पार्को के निर्माण में हुए घोटाले की जांच लोकायुक्त एन के मेहरोत्रा को सौंपी थी। लोकायुक्त ने मई 2012 को राज्य सरकार को सौंपी अपनी जांच रिपोर्ट में पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा और नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा कई जनप्रतिनिधियों, लोक निर्माण विभाग व राज्य निर्माण निगम के अभियंताओं सहित 199 लोगों को दोषी ठहराते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति की थी।

मालूम हो कि मई 2012 में तात्कालिक डीआइजी आशुतोष पांडेय ने कई मूर्तिकारों की शिकायत पर हाथी मूर्ति व स्मारक निर्माण में करोड़ों रुपये के घोटाले का राजफाश किया था। तब पुलिस ने गोमतीनगर व कृष्णानगर थाने में कई ठेकेदारों सहित राजकीय निर्माण निगम व लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी के अलग-अलग मुकदमे दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने हाथी मूर्तियों की सप्लाई का काम करने वाले एक बड़े ठेकेदार को गिरफ्तार भी किया था। स्मारक निर्माण में करोड़ों रुपये की धांधली सामने आने पर शासन ने इस मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा को स्थानांतरित कर दी थी। इस मामले में ईओडब्ल्यू अब तक जांच के दायरे में आए करीब 25 से अधिक अधिकारियों व कर्मचारियों के बयान दर्ज कर चुकी है।

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