13 जनवरी, 2014

मकर संक्रांति पर क्या करें, क्या नहीं

संक्रान्तियों मे कर्क संक्रान्ति तथा मकर संक्रान्ति का विशेष महत्व धार्मिक तथा वैज्ञानिक दोनो रुपों मे माना जाता है। मकर संक्रान्ति एक मात्र ऐसा पर्व है जो सदैव ही 14 जनवरी को होता है मकर संक्रान्ति का पर्व सौर वर्ष के आधार पर निर्धारित है। सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि मे प्रवेश की प्रक्रिया संक्रान्ति कहलाती है सूर्य का मकर रेखा से कर्क रेखा की ओर जाना उत्तरायण तथा कर्क रेखा से दक्षिणी मकर रेखा की ओर जाना दक्षिणायन कहलाता है उत्तरायण मे दिन बड़े तथा रातें छोटी प्रतीत होती हैं धूप मे तेजी तथा शीत मे धीरे-धीरे कमी आने लगती है दक्षिणायन मे यही प्रक्रिया ठीक विपरीत स्थिति मे होती है अर्थात् दिन छोटे और राते बड़ी प्रतीत होती है यही अंतराल ऋतु परिवर्तन का कारक और कारण है वैसे तो मकर संक्रान्ति सूर्य के संक्रमण का त्यौहार है। धर्म शास्त्रों के अनुसार उत्तरायण के समय देवताओं का निवास दिन मे तथा दक्षिणायन मे रात्रि मे होता है। उत्तरायण को देवयान तथ दक्षिणायन को पितृयान कहा जाता है। कहा जाता है कि मकर संक्रान्ति के दिन किसी भी धार्मिक क्रिया-कलाप मे देवता धरती पर प्रकट होते हैं तथा पुण्यात्मायें शरीर छोड़कर स्वर्ग लोक मे जाती हैं।

सूर्य को यदि वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाय तो सूर्य के मकर राशि मे प्रवेश करते ही अयन बदलता है यही वजह है कि मकर संक्रान्ति को सौम्यायन कहते हैं। सौम्यांयन के प्रारम्भ से ही हेमन्त ऋतु की समाप्ति तथा शिशिर ऋतु का प्रारम्भ हो जाता है। सूर्य सदैव मार्गी रहता है कभी भी अस्त नही होता है। अपनी निर्धारित चाल के साथ सदैव चलता रहता है और अपने निश्चित समय निश्चित राशियों मे पहुंच जाता है। प्रत्येक माह मे सूर्य एक राशि का भ्रमण पूरा कहते है सूर्य जी सदैव गतिशील रहकर 12 राशियों का भ्रमण 1 वर्ष मे पूरा कर लेते हैं। यही क्रिया ऋतु परिवर्तन का कारण बनती है।

मकर संक्रान्ति मे क्या करें-

सूर्य का मकर राशि मे प्रवेश 14 जनववरी दोपहर में 2 बजकर 20 मिनट पर है साथ मे दिन मे 9 बजकर 7 मिनट से पंचक भी प्रारम्भ हो जाते हैं। अर्थात् प्रातः काल सूर्योदय के साथ ही पुण्य काल प्रारम्भ हो जायेगा जो अर्धरात्रि तक है।

1. मकर संक्रान्ति के पर्व का विधान अत्यन्त सरल है। संक्रान्ति के दिन प्रातः तिल का तेल और उबटन लगाकर स्नान करना चाहिये।
2. तिल के तेल से मिश्रित जल से स्नान करना चाहिये।
3. तिल का उबटन लगाना स्वास्थ्य के लिये हितकर है।
4. तिल से होम करने से तमाम यज्ञों का पुण्य फल प्राप्त होगा।
5. जल मे तिल डालकर पानी पीना उत्तम है।
6. तिल से बने पदार्थो का खाना हितकर है तथा सुयोग्य पात्र को तिल का दान करना हितकर है।

क्या न करें-

1. अपने अभिभावक पिता का अनादर न करें।
2. भगवान भास्कर की पूजा अराधना के अवसर पर तिल-गुड़, चीनी के लड्डू दान करने की परम्परा है लेकिन सुयोग्य पात्र को ही दान करना हितकर है।
3. कम्बल तथा शुद्ध देशी घी का दान गरीब, बेसहारा लोगों को ही करना उत्तम होगा।
4. सुयोग्य पात्र को ही मकर संक्रान्ति के पावन अवसर पर दान करना चाहिये।
5. सूर्य देव की उपासना, अराधना तथा सूर्य देव से जुड़ी किसी भी वस्तु का दान प्रसन्नचित्त होकर तथा प्रसन्न मन से करना चाहिये। तथा भगवान भास्कर का आशीष आपको तथा आपके परिवार को प्राप्त होगा।

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