17 सितंबर, 2014

..यहाँ स्त्री रूप में पूजे जाते हैं शुभ-लाभ के स्वामी भगवान गणेश!

अभी तक आपने भगवान भोलेनाथ को ही सुना था कि उनकी माँ दुर्गा की रूप में पूजा की जाती है| आज आपको उनके बेटे भगवान श्रीगणेश के बारे में बताने जा रहे हैं| एक ऐसा स्थान जहाँ भगवान गणेश की स्त्री के रूप में पूजा की जाती है| हिन्दू धर्म शास्त्रों के मुताबिक प्रथम पूज्य देवता श्री गणेश बुद्धि, श्री यानी सुख-समृद्धि और विद्या के दाता हैं। उनकी उपासना और स्वरूप मंगलकारी माने गए हैं। गणेश के इस नाम का शाब्दिक अर्थ– भयानक या भयंकर होता है। क्योंकि गणेश की शारीरिक रचना में मुख हाथी का तो धड़ पुरुष का है। सांसारिक दृष्टि से यह विकट स्वरूप ही माना जाता है। किंतु इसमें धर्म और व्यावहारिक जीवन से जुड़े गुढ़ संदेश है। 

रिद्धि-सिद्धि के दाता और शुभ-लाभ के स्वामी भगवान गणेश के अनेकों नामों में से उनका एक नाम विनायकी भी है अर्थात गणेश-लक्षणों युक्त स्त्री। धर्म शास्त्रों में गणपति को स्त्री रूप में पूजते हुए उन्हें विनायकी, गजानना, विद्येश्वरी और गणेशिनी भी कहा गया है। ये सभी नाम गणेश जी के संबंधित नामों के स्त्रीलिंग रूप हैं। हथिनी का सिर वाली स्त्री की कई प्रतिमाएं भी मिली हैं, जिनमें गणेश की तरह लंबोदर, फरसा, मोदक, अभय मुद्रा, मूषक जैसे लक्षण भी हैं। हालांकि यह पक्के तौर पर नहीं कहा जा सकता कि ये स्त्री गणेश ही हैं। दरअसल, हिन्दू धर्म की तंत्र शाखा में एक योगिनी हथिनी के सिर वाली है। जबलपुर के समीप चौसठ योगिनी मंदिर और उड़ीसा के हीरापुर स्थित योगिनी मंदिर में ऐसी प्रतिमाएं देखी जा सकती हैं।

विदिशा के समीप विनायक और विनायकी के दोनों रूप एक साथ विराजित हैं। कोलकाता के संग्रहालय में वृषभमुखी अष्टभुजी दुर्गा के समीप चतुर्भुजी विनायकी की छोटी-सी प्रतिमा है। मान्यता है कि यह प्रतिमा सतना से प्राप्त हुई थी। इसके अतिरिक्त विंध्य, तमिलनाड़ु के चिदंबरम, मदुरै और सुचिंद्रम, उड़ीसा के रानीपुर झरियाल, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात, बिहार और असम में भी ऐसी प्रतिमाएं प्राप्त होती रही हैं।

भक्तों का मानना है कि भगवान गणेश के लक्षणों से युक्त स्त्री माता पार्वती की दासी मालिनी हो सकती है, जिन्होंने एक कम प्रचलित कथा के अनुसार गणेश को गर्भ में रखा था। कहीं उन्हें शिव के एक रूप ईशान की पुत्री भी कहा गया है। एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, अंधकासुर के वध के लिए देवियों ने अपनी-अपनी शक्तियों का एक सम्मिलित रूप तैयार किया था। मतस्य पुराण और विष्णु धर्मत्तोर पुराण गणपित की शक्ति को योद्धा देवियों के साथ ही सूची बद्ध करते हैं। इसी शक्ति का नाम विनायकी और गणेश्वरी है। स्त्री गणेश को सप्तमातृका में से एक माना जाता है, जबिक कहीं-कहीं उन्हें नव मातृका भी कहा गया है।

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