19 अगस्त, 2015

सदियों से मनुष्य को डराते आ रहे हैं सांपों से जुड़े यह अन्धविश्वास

धर्म ग्रंथों के अनुसार, श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन भगवान भोलेनाथ के साथ-साथ उनके गले के श्रृंगार नाग देवता की भी पूजा की जाती है| सांप के बारे में बता दें कि यह एक ऐसा जीव है जो सदियों से मनुष्यों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। पुरातन समय से ही सांपों से जुड़ी कई मान्यताएं व किवदंतियां हमारे समाज में फैली हुई हैं। इन मान्यताओं के साथ कई अंधविश्वास भी हैं जो सदियों से मनुष्य को डराते आ रहे हैं। आज हम आपको सांपों से जुड़े कुछ ऐसे ही अंधविश्वासों के बारे में बता रहे हैं।

कहा जाता है कि कुछ सांप इच्छाधारी होते हैं यानी वे अपनी इच्छा के अनुसार कोई भी रूप धारण कर सकते हैं कभी-कभी ये मनुष्यों का रूप भी धारण कर लेते हैं, कई हिंदी फिल्मो में भी यह दिखाया गया है लेकिन यह मान्यता पूरी तरह से गलत है| जीव विज्ञान के अनुसार इच्छाधारी सांप सिर्फ मनुष्यों का अंधविश्वास और कोरी कल्पना है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं।

कुछ लोग दावा करते हैं कि दोमुंहे सांप भी होते हैं जो पूरी तरह से गलत है| जीव विज्ञान के अनुसार किसी भी सांप के दोनों सिरों पर मुंह नहीं होते। हर सांप का एक ही मुंह होता है। कुछ सांपों की पूंछ नुकीली न होकर मोटी और ठूंठ जैसी दिखाई देती है। चालाक सपेरे ऐसे सांपों की पूंछ पर चमकीले पत्थर लगा देते हैं जो आंखों की तरह दिखाई देते हैं और देखने वाले को यह लगता है कि इस सांप को दोनों सिरों पर दो मुंह हैं।

हमारे समाज में ऐसी मान्यता है कि यदि कोई मनुष्य किसी सांप को मार दे तो मरे हुए सांप की आंखों में मारने वाली की तस्वीर उतर आती है, जिसे पहचान कर सांप का साथी उसका पीछा करता है और उसको काटकर वह अपने साथी की हत्या का बदला लेता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से यह मान्यता पूरी तरह से अंधविश्वास पर आधारित है क्योंकि सांप अल्पबुद्धि वाले जीव हैं। इनका मस्तिष्क इतना विकसित नहीं होता कि ये किसी घटनाक्रम को याद रख सकें और बदला लें। जीव विज्ञान के अनुसार जब कोई सांप मरता है तो वह अपने गुदा द्वार से एक खास तरह की गंध छोड़ता है जो उस प्रजाति के अन्य सांपों को आकर्षित करती है। इस गंध को सूंघकर अन्य सांप मरे हुए सांप के पास आते हैं, जिन्हें देखकर ये समझ लिया जाता है कि अन्य सांप अपने मरे हुए सांप की हत्या का बदला लेने आए हैं।

सांपों से जुडी एक यह भी मान्यता है कि सांप उड़ते भी है| कहते हैं कि उड़ते हुए सांप की परछाई जिस किसी पर पड़ जाती है उसे लकवा मार जाता है| जबकि यह गलत है सांप कभी भी नहीं उड़ पाते हैं| सांप की कुछ विशेष प्रजातियां होती हैं जो अधिकांश समय पेड़ों पर निवास करती है, इस प्रजाति के सांपों में एक नैसर्गिक गुण होता है कि ये उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर पहुंच जाते हैं लेकिन इन पेड़ों की दूरी बहुत कम होती है। जब ये सांप उछलकर एक पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाते हैं तो ऐसी प्रतीत होता है कि जैसे ये उड़ रहे हों।

कहते हैं कि कुछ सांपों की मुंछे भी होती हैं ये तथ्य भी पूरी तरह से अंधविश्वास है। जीव विज्ञान के अनुसार मुंछ वाले सांप होते ही नहीं हैं, ये किसी शातिर सपेरे के दिमाग की उपज होती है। सांप को कोई
खास स्वरूप देने पर अच्छी कमाई हो सकती है इसी लालच में सपेरे घोड़े की पूंछ के बाल को बड़ी ही सफाई से सांप के ऊपरी जबड़े में पिरोकर सिल देता है।

हिंदू धर्म में सांप को दूध पिलाने का प्रचलन है जो कि पूरी तरह से गलत है। जीव विज्ञान के अनुसार सांप पूरी तरह से मांसाहारी जीव है, ये मेंढक, चूहा, पक्षियों के अंडे व अन्य छोटे-छोटे जीवों को खाकर अपना पेट भरते हैं। इनके शरीर को अतिरिक्‍त पानी की आवश्‍यकता नहीं होती है। इनके शरीर को जितने पानी की आवश्‍यकता होती है, उसकी पूर्ति ये अपने शिकार के शरीर में मौजूद पानी से कर लेते हैं। दूध इनका प्राकृति आहार नहीं है। नागपंचमी के दिन कुछ लोग नाग को दूध पिलाने के नाम पर इन पर अत्याचार करते हैं क्योंकि इसके पहले ये लोग सांपों को कुछ खाने-पीने को नहीं देते। भूखा-प्यासा सांप दूध को पी तो लेता है लेकिन कई बार दूध सांप के फेफड़ों में घुस जाता है जिससे उसे निमोनिया हो जाता है और इसके कारण सांप की मौत भी हो जाती है।

कुछ लोग सांप को अपनी बीन की धुन पर नचाने का दावा करते हैं जबकि ये पूरी तरह से अंधविश्वास है क्योंकि सांप के तो कान ही नहीं होते। दरअसल ये मामला सांपों की देखने और सुनने की शक्तियों और क्षमताओं से जुड़ा है। सांप हवा में मौजूद ध्वनि तरंगों पर प्रतिक्रिया नहीं दर्शाते पर धरती की सतह से निकले कंपनों को वे अपने निचले जबड़े में मौजूद एक खास हड्डी के जरिए ग्रहण कर लेते हैं।
सांपों की नजर ऐसी है कि वह केवल हिलती-डुलती वस्तुओं को देखने में अधिक सक्षम हैं बजाए स्थिर वस्तुओं के। सपेरे की बीन को इधर-उधर लहराता देखकर नाग उस पर नजर रखता है और उसके अनुसार ही अपने शरीर को लहराता है और लोग समझते हैं कि सांप बीन की धुन पर नाच रहा है।

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