04 सितंबर, 2015

मां के हाथ से फिसला और समंदर में समा गया बच्चा, दुनिया में अफसोस

तुर्की के तट पर पड़े बच्चे के शव की तस्वीर ने दुनिया को हिलाकर रख दिया था। उसके पिता अब्दुल्ला ने कहा है उनके बच्चे 'उनके हाथों से फिसल गए थे।' जब यह घटना हुई, उस समय उनकी नौका यूनान जा रही थी। अब्दुल्ला ने अपने तीन वर्षीय बेटे आयलान, चार वर्षीय बेटे घालेब और पत्नी रिहाना को इस त्रासदी में खो दिया। 

अब्दुल्ला ने बताया कि मैंने अपनी पत्नी का हाथ पकड़ा हुआ था लेकिन मेरे बच्चे मेरे हाथों से फिसल गए। वहां अंधेरा था और हर तरफ चीख पुकार मची थी। हमने छोटी नौका से चिपके रहने की कोशिश की लेकिन उसकी हवा निकल रही थी। यूनानी द्वीप कॉस की ओर जा रही दो नौकाएं बुधवार को तुर्की जलक्षेत्र में डूब गई थीं, जिसके कारण 12 सीरियाई प्रवासी मारे गए थे।

इस पूरी त्रासदी में तीन वर्षीय आयलान की मौत ने दुनियाभर का ध्यान खींचा है। आयलान का शव एक तस्वीर में बोद्रुम के एक रिजॉर्ट के तट पर पड़ा हुआ दिखाया गया। यह तस्वीर जल्दी ही वायरल हो गई और शरणार्थियों की त्रासदी का एक प्रतीक बन गई। दूसरी तस्वीर में एक तुर्की सुरक्षा अधिकारी बच्चे को अपनी गोद में उठाकर ले जाता हुआ दिखाया गया है।

बताया जा रहा है कि अब्दुल्ला अपने परिवार और लगभग तीन अन्य सीरियाई लोगों के साथ इस जलक्षेत्र को पार करने की कोशिश कर रहे थे। ओटावा सिटीजन अखबार की खबर में कहा गया कि परिवार अंततः कनाडा जाने की कोशिश कर रहा था। उनकी बहन टीमा ने शरणार्थी आवेदन को प्रायोजित किया था लेकिन कनाडा के आव्रजन अधिकारियों ने इसे जून में खारिज कर दिया था। टीमा 20 साल पहले कनाडा में जा बसी थीं और अब वह वैंकूवर में हेयरड्रेसर के तौर पर काम करती हैं।

एलन को लेकर आम लोगों के साथ-साथ सरकारों के बीच भी बहस छिड़ी। जर्मनी ने कहा कि यूरोप के सभी देश रिफ्यूजियों को जगह देने से इनकार करने लगेंगे तो इससे ‘आइडिया ऑफ यूरोप’ ही खत्म हो जाएगा। ये बच्चा बच सकता था, यदि यूरोप के देश इन लोगों को शरण देने से इनकार नहीं करते। तुर्की के प्रेसिडेंट रीसेप अर्डान ने जी20 समिट में यहां तक कह दिया कि इंसानियत को इस मासूम की मौत की जिम्मेदारी लेनी होगी। गुरुवार शाम तक जर्मनी और फ्रांस ने एलान किया कि शरणार्थियों के लिए यूरोपीय देशों का कोटा तय होगा। मौजूदा नियम में भी ढील दी जाएगी। ताकि लोगों का आना आसान हो।

एलन की तस्वीर लेने वाले फोटोग्राफर निलुफेर देमीर ने कहा कि मैंने बच्चे को तट पर देखा। मुझे लगा कि इस बच्चे में अब जिंदगी नहीं बची है, तो मैंने तस्वीर लेने की सोची। ताकि दुनिया को बताया जा सके कि हालात कितने खराब हो चुके हैं।

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