21 अप्रैल, 2016

इस वर्ष विशेष योगों के साथ मनेगी हनुमान जयंती

हनुमान जी को हिन्दु धर्म में कष्ट विनाशक और भय नाशक देवता के रूप में जाना जाता है| हनुमान जी अपनी भक्ति और शक्ति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं| सारे पापों से मुक्त करने ओर हर तरह से सुख-आनंद एवं शांति प्रदान करने वाले हनुमान जी की उपासना लाभकारी एवं सुगम मानी गयी है। पुराणों के अनुसार कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी मंगलवार, स्वाति नक्षत्र मेष लग्न में स्वयं भगवान शिवजी ने अंजना के गर्भ से रुद्रावतार लिया।

आपको बता दें कि जब भी दास्य भक्ति का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण देना होता है तो हनुमान की रामभक्ति का स्मरण होता है। वे अपने प्रभु पर प्राण अर्पण करने के लिए सदैव तैयार रहते थे। प्रभु राम की सेवा की तुलना में शिवत्व व ब्रह्मत्व की इच्छा भी उन्हें कौडी के मोल की लगती थी। हनुमान सेवक व सैनिक का एक सुंदर सम्मिश्रण हैं। हनुमान अर्थात शक्ति व भक्ति का संगम। अंजनी को भी दशरथ की रानियों के समान तपश्चर्या द्वारा पायस (चावल की खीर, जो यज्ञ-प्रसाद के तौरपर बाँटी जाती है) प्राप्त हुई थी व उसे खाने के उपरांत ही हनुमानका जन्म हुआ था। उस दिन चैत्रपूर्णिमा थी, जो आज हनुमान जयंती’ के रूप में मनाई जाती है । इस बार हनुमान जयंती 22 अप्रैल दिन शुक्रवार को है|

इस वर्ष हनुमान जयंती पर तीन विशेष योग के साथ मनेगी। वहीं संकट मोचन की जयंती चंद्रग्रहण मुक्त मनेगी। चैत्र शुक्ल पक्ष पूर्णिमा शुक्रवार 22 अप्रैल को आ रही हनुमान जयंती में वज्र योग, सिद्धी योग और राज योग बनने के साथ ही उधा के सूर्य, उधा के शुक्र एवं सिंह राशि में गुरु तथा चंद्र व सूर्य की परस्पर दृष्टि बन रही है। हनुमान जयंती पर यह विशेष योग 12 साल बाद बना है।

हनुमान जयंती पर 22 अप्रैल को वज्र योग चित्रा नक्षत्र में सुबह 6.11 बजे से शुरू होकर दूसरे दिन स्वाति नक्षत्र में सुबह 8.48 बजे तक रहेगा। शुक्रवार सुबह 6.11बजे सूर्योदय होगा। इसी समय हनुमानजी का जन्म माना है। सिद्धी योग शुक्रवार सुबह 10.41 से शाम 5.37 बजे तक तथा राज योग सूर्योदय से दोपहर 3.08 बजे तक रहेगा। इसके साथ ही उच्च के सूर्य, उच्च के शुक्र एवं सिंह राशि में गुरु तथा चंद्र व सूर्य की परस्पर दृष्टि बन रही है।

चैत्र पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती मनाई जाती है। प्राय: शनिवार व मंगलवार हनुमान के दिन माने जाते हैं। इस दिन हनुमानजी की प्रतिमा को सिंदूर व तेल अर्पण करने की प्रथा है। कुछ जगह तो नारियल चढाने का भी रिवाज है। अध्यात्मिक उन्नति के लिए वाममुखी (जिसका मुख बाईं ओर हो) हनुमान या दास हनुमान की मूर्ति को पूजा में रखते हैं।

अगर धन या पैसों से जुड़ी समस्याओं से निजात पाना चाहते है, दुर्भाग्य को दूर करना है तो हनुमानजी के ऐसे फोटो की पूजा करनी चाहिए जिसमें वे स्वयं श्रीराम, लक्ष्मण और सीता माता की आराधना कर रहे हैं। पवनपुत्र के भक्ति भाव वाली प्रतिमा या फोटो की पूजा करने से उनकी कृपा तो प्राप्त होती है साथ ही श्रीराम, लक्ष्मण और माता सीता की कृपा भी प्राप्त होती है। इन देवी-देवताओं की प्रसन्नता के बाद दुर्भाग्य भी सौभाग्य में परिवर्तित हो जाता है।  

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