23 मार्च, 2012

धरती का दूसरा स्वर्ग है मनाली

मनाली हिमाचल प्रदेश राज्य में स्थित कुल्लू घाटी का प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है। मनाली कुल्लू से उत्तर दिशा में केवल 40 किमी की दूरी पर लेह की ओर जाने वाले राष्‍ट्रीय राजमार्ग पर घाटी के सिरे के पास स्थित है। मनाली भारत का प्रसिद्ध पर्वतीय स्थल है। समुद्र तल से 2050 मीटर की ऊँचाई पर स्थित मनाली व्यास नदी के किनारे बसा हुआ है। सर्दियों में मनाली का तापमान 0° से नीचे पहुँच जाता है। मनाली में आप यहाँ के ख़ूबसूरत प्राकृतिक दृश्यों के अलावा हाइकिंग, पैराग्लाइडिंग, राफ्टिंग, ट्रैकिंग, कायकिंग जैसे खेलों का भी आनंद उठा सकते हैं। 

मनाली के जंगली फूलों और सेब के बगीचों से छनकर आती सुंगंधित हवाएँ दिलो दिमाग को ताज़गी से भर देती हैं। सबसे पहले बर्फ़ से ढकी हुई पहाडियाँ, साफ पानी वाली व्‍यास नदी दिखाई देती है। दूसरी ओर देवदार और पाइन के पेड़, छोटे छोटे खेत और फलों के बागान दिखाई देते हैं।

हिमाचल प्रदेश में स्थित मनाली कुल्लू घाटी के पूर्वी छोर पर बसा शांत पर्वतीय पर्यटन स्थल है। बर्फ से ढंकी चोटियां, देवदार के ऊंचे वृक्ष, कलकल बहती व्यास नदी और शांत-प्राकृतिक नजारों से भरपूर वातावरण पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर खींच लेता है.

मनाली में रोमांचकारी पर्यटन भी मशहूर हैं। यहां स्थित पर्वतारोहण संस्थान रोमांचकारी पर्यटन में इच्छुक पर्यटकों को गर्मियों में पर्वतारोहण का प्रशिक्षण भी देता है। मनाली शीतकालीन खेल पर्यटाकों के लिए भी आकर्षण का केन्द्र है। 

प्रमुख आकर्षण-

हिडिम्बा मंदिर-

समुद्र तल से 1533 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर धूंगरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर यहां की स्थानीय देवी हिडिम्बा को समर्पित है। हिडिम्बा महाभारत में वर्णित भीम की पत्नी थी। मई के महीने में यहां एक उत्सव मनाया जाता है। महाराज बहादुर सिंह ने यह मंदिर 1553 ई. में बनवाया था। लकड़ी से निर्मित यह मंदिर पैगोड़ा शैली में बना है। 

वशिष्ठ-

मनाली से 3 किमी. दूर वशिष्ठ स्थित है। प्राचीन पत्थरों से बने मंदिरों का यह जोड़ा एक दूसरे के विपरीत दिशा में है। एक मंदिर भगवान राम को और दूसरा संत वशिष्ठ को समर्पित है।

कोठी-

मनाली से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, कोठी। यहां से पहाड़ों का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। यहां बीस नदी का तेजी से बहता ठंडा पानी अदभुत नजारा पेश करता है।

राहला फॉल्स, मनाली सैंचुरी-

कोठी से दो किमी की दूरी पर बीस नदी पर राहला फॉल्स स्थित है। यहां 50 मीटर की ऊंचाई से गिरता झरने का पानी सैलानियों को खूब लुभाता है। मनाली सैंचुरी में पर्यटक कैपिंग के लिए पहुंचते हैं।

सोलन वैली-

यहां से 13 किलोमीटर की दूरी पर स्थित सोलन वैली सैलानियों को खासी आकर्षित करती है। यहां ट्रैकिंग, स्कीइंग और माउंटेनियरिंग के कैंप आयोजित किए जाते हैं। 10 से 14 फरवरी के बीच यहां सालाना विंटर कार्निवाल का आयोजन किया जाता है।

रोहतांग दर्रा-

मनाली से 50 किमी. दूर समुद्र तल से 4111 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह दर्रा साहसिक पर्यटकों को बहुत रास आता है। दर्रे के पश्चिम में दसोहर नामक एक खूबसूरत झील है। गर्मियों के दिनों मे भी यह स्थान काफी ठंडा रहता है। जून से नवंबर के बीच लाहौल घाटी से यहां पहुंचा जा सकता है। यहां से कुछ दूरी पर सोनपानी ग्लेशियर है।

रोहतांग भी है मनाली के पास-

मनाली के आस-पास के इलाकों में सैलानियों के लिए बहुत कुछ बिखरा पड़ा है। प्रकृति ने यहां आने वालों के लिए अपना खजाना दोनों हाथों से खोल दिया है। पहाड़ियों पर बने छोटे-छोटे घर और इनके आस-पास फैली हरियाली मन को लुभाती है। यहां से 51 किमी की दूरी पर मशहूर पर्यटक स्थल रोहतांग पास स्थित है। यहां हर साल हजारों की संख्या में सैलानी घूमने के लिए आते हैं।

व्यास कुंड-

यह कुंड पवित्र व्यास नदी का जल स्रोत है। व्यास नदी में झरने के समान यहां से पानी बहता है। यहां का पानी एकदम साफ और इतना ठंडा होता है कि उंगलियों को सुन्न कर देता है। इसके चारों ओर पत्थर ही पत्थर हैं और वनस्पतियां बहुत कम हैं। 

ओल्ड मनाली-

मनाली से 3 किमी. उत्तर पश्चिम में ओल्ड मनाली है जो बगीचों और प्राचीन गेस्टहाउसों के लिए काफी प्रसिद्ध है। मनालीगढ़ नामक क्षतिग्रस्त किला भी यहां देखा जा सकता है। 

सोलंग नुल्लाह-

मनाली से 13 किमी की दूरी पर स्थित सोलंग नुल्लाह 300 मीटर की स्की लिफ्ट के लिए लोकप्रिय है। इस खूबसूरत स्थान से ग्लेशियर और बर्फ से ढकी पहाड़ों की चोटियों के मनोहर नजारे देखे जा सकते हैं। नजदीक ही मनाली की प्रारंभिक राजधानी जगतसुख भी देखने योग्य जगह है। 

मनु मंदिर-

ओल्ड मनाली में स्थित मनु मंदिर महर्षि मनु को समर्पित है। यहां आकर उन्होंने ध्यान लगाया था। मंदिर तक पहुंचने का मार्ग दुरूह और रपटीला है। 

अर्जुन गुफा-

कहा जाता है महाभारत के अर्जुन ने यहां तपस्या की थी। इसी स्थान पर इन्द्रदेव ने उन्हें पशुपति अस्त्र प्रदान किया था। 

कब जाएं-

यहां जाने के लिए गर्मी के लिहाज से मार्च से जून और ठण्ड के लिहाज से अक्टूबर से फरवरी के महीने ज्यादा ठीक रहते हैं। 

कैसे जाएं-

वायुमार्ग - मनाली से 50 किमी. की दूरी पर भुंटार नजदीकी एयरपोर्ट है। मनाली पहुंचने के लिए यहां से बस या टैक्सी की सेवाएं ली सकती हैं।

रेलमार्ग - जोगिन्दर नगर नैरो गैज रेलवे स्टेशन मनाली का नजदीकी रेलवे स्टेशन है, जो मनाली से 135 किमी. की दूरी पर है। मनाली से 310 किमी. दूर चंडीगढ़ नजदीकी ब्रॉड गेज रेलवे स्टेशन है। 

सड़क मार्ग - मनाली हिमाचल और आसपास के शहरों से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है। राज्य परिवहन निगम की बसें अनेक शहरों से मनाली जाती हैं। 

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